नासिक TCS केस: आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत पर कोर्ट में हुई सुनवाई, जानें वकील ने क्या कहा
Nashik TCS Case: नासिक के चर्चित TCS महिला उत्पीड़न मामले में आरोपी निदा एजाज खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने एट्रोसिटी एक्ट और मेडिकल आधार पर राहत की मांग की है।
- Written By: आकाश मसने
नासिक TCS केस के आरोपी (सोर्स: साेशल मीडिया)
Nida Khan Anticipatory Bail Hearing: नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में महिलाओं के साथ हुए कथित यौन शोषण और उत्पीड़न के मामले ने कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस मामले की मुख्य आरोपी निदा एजाज खान की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका पर आज नासिक सत्र न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत में सुबह के सत्र से ही दोनों पक्षों के बीच कानूनी दांव-पेंच देखने को मिले।
बचाव पक्ष की दलीलें और प्रेग्नेंसी का हवाला
आरोपी निदा खान की ओर से वरिष्ठ वकील राहुल कासलीवाल ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। पहला, इस मामले में लगाई गई एट्रोसिटी एक्ट (SC/ST Act) की धाराओं को चुनौती दी गई है। वकील कासलीवाल का तर्क है कि ये धाराएं मामले को और अधिक गंभीर बनाने के उद्देश्य से जोड़ी गई हैं, जबकि उनके अनुसार कानूनी रूप से ये यहां लागू नहीं होतीं।
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दूसरा और सबसे संवेदनशील पहलू मानवीय आधार का रहा। बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपी निदा खान गर्भवती (Pregnant) हैं। उनकी मेडिकल स्थिति और प्रेग्नेंसी को आधार बनाते हुए अंतरिम बेल की मांग की गई है ताकि उन्हें कानूनी प्रक्रिया के दौरान आवश्यक चिकित्सीय देखभाल मिल सके।
Nashik TCS Case: अभियोजन पक्ष का विरोध
दूसरी ओर, नासिक TCS केस में सरकारी वकील (Prosecution) और शिकायतकर्ता की लीगल टीम ने जमानत का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि मामला गंभीर प्रकृति का है और हाई-प्रोफाइल IT कंपनी से जुड़ा होने के कारण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सुबह के सत्र में पूरी तरह से इंटरिम बेल एप्लीकेशन पर फोकस रहा।
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कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
वकील राहुल कासलीवाल ने बयान दिया कि हमने अदालत के समक्ष मेडिकल और कानूनी आधार रखे हैं। अंतरिम बेल अंतिम निर्णय आने तक आरोपी को अस्थायी राहत और सुरक्षा प्रदान करती है। लंच ब्रेक के बाद कोर्ट द्वारा इस पर कोई ठोस आदेश आने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि अभी तक इस पर कोई अपडेट नहीं मिला है। शहर की इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या कोर्ट ‘प्रेग्नेंसी’ जैसे मानवीय आधार पर राहत देता है या कानूनी धाराओं की गंभीरता को प्राथमिकता दी जाती है।
