TCS नासिक केस: धर्म परिवर्तन से निदा खान तक, कंपनी ने हर सवाल का दिया जवाब; POSH को लेकर भी कही बड़ी बात

TCS Nashik Case: TCS नासिक यूनिट में यौन और धार्मिक उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बीच कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें आंतरिक सिस्टम या POSH चैनलों पर कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।
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निदा खान व TCS (सोर्स: सोशल मीडिया)
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TCS On Nashik POSH Compliance: आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने नासिक शाखा में सामने आए यौन उत्पीड़न और धार्मिक प्रताड़ना के मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। कंपनी ने 17 अप्रैल 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 2022 से 2026 के बीच नासिक इकाई में जिन घटनाओं को लेकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं, उनके संबंध में कंपनी के आंतरिक 'प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट' (POSH) या एथिक्स चैनलों पर कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी।

सीईओ के. कृतिवासन का बयान

TCS के सीईओ और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने कहा कि कंपनी की प्रणालियों और रिकॉर्ड की प्रारंभिक समीक्षा से संकेत मिलता है कि कथित प्रकृति की कोई भी शिकायत कंपनी तक नहीं पहुंची थी। उन्होंने दोहराया कि टीसीएस कर्मचारी कल्याण और संस्थागत आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करती है। कृतिवासन ने स्पष्ट किया कि कंपनी किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या कदाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले के पारदर्शी और सही निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कंपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद मार्च में तब शुरू हुआ जब नासिक बीपीओ यूनिट की एक महिला कर्मचारी ने अपने सहयोगी पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान, 2022 से 2026 के बीच हुए मानसिक और यौन उत्पीड़न से संबंधित आठ और एफआईआर दर्ज की गईं। इन शिकायतों में वरिष्ठ प्रबंधकों द्वारा कार्रवाई न करने, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास और हिंदू देवी-देवताओं के अपमान जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि 18 से 25 वर्ष की महिला कर्मचारियों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया और उन्हें विशिष्ट धार्मिक प्रथाओं को अपनाने या मांसाहारी भोजन करने के लिए मजबूर किया गया।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां

नासिक पुलिस की अपराध शाखा द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की तहकीकात कर रहा है। अब तक कुल नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में रजा मेमन, शफी शेख, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, तौसीफ अत्तार और दानिश शेख शामिल हैं। एक महिला आरोपी अश्विनी चैनानी भी न्यायिक हिरासत में है, जिस पर आरोप है कि उसने शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। मामले की एक और मुख्य आरोपी निदा खान अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

TCS की आंतरिक जांच और स्वतंत्र पैनल

कंपनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्वतंत्र ओवरसाइट कमेटी (निगरानी समिति) का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री कर रहे हैं। इसके अलावा, डेलॉयट (Deloitte) और कानूनी फर्म ट्राईलीगल (Trilegal) को स्वतंत्र परामर्शदाता के रूप में नियुक्त किया गया है।

कंपनी की यह आंतरिक जांच टीसीएस की प्रेसिडेंट और सीओओ आरती सुब्रमण्यन के नेतृत्व में की जा रही है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने भी इन आरोपों को "अत्यधिक चिंताजनक और व्यथित करने वाला" बताया है और जवाबदेही तय करने का आश्वासन दिया है।

TCS ने अफवाहों को किया खंडन

कंपनी ने मीडिया में चल रही कुछ अफवाहों का भी खंडन किया है। टीसीएस ने साफ किया कि फरार आरोपी निदा खान कोई एचआर मैनेजर नहीं थी, बल्कि वह एक 'प्रोसेस एसोसिएट' थी जिसके पास भर्ती या नेतृत्व की कोई जिम्मेदारी नहीं थी। साथ ही, कंपनी ने नासिक यूनिट के बंद होने की खबरों को भी गलत बताया और कहा कि वहां कामकाज सुचारू रूप से जारी है।

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