प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Water Crisis: नासिक गर्मियों के दौरान संभावित पानी की किल्लत से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने 7 करोड़ 38 लाख 25 हजार रुपये का संकट निवारण आराखडा (कृती आराखडा) तैयार किया है। इस योजना के अनुसार, जिले के 1,084 गांवों और ढाणियों में भीषण जल संकट की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। प्रशासन ने पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 162 टैंकरों को तैनात करने का प्रस्ताव रखा है।
हालांकि इस साल औसत से अधिक बारिश के कारण बांध और तालाब लबालब भरे हुए हैं, लेकिन स्थिति कभी भी बदल सकती है। अक्टूबर से दिसंबर तक का पहला चरण संतोषजनक रहा क्योंकि विहिरी और तालाबों में पर्याप्त जल उपलब्ध था।
जनवरी से मार्च और विशेषकर अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण बढ़ेगा और भूजल स्तर में भारी गिरावट आने की संभावना है। प्रशासन ने टैंकरों द्वारा जलापूर्ति, निजी कुओं के अधिग्रहण और प्रगति पर चल रही नल-जल योजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने को प्राथमिकता दी है।
संभावित किल्लत से निपटने के लिए बजट को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। टैंकरों के माध्यम से – जलापूर्ति के लिए 6 करोड़ 36 लाख 48 हजार रुपये का फंड प्रस्तावित है। वहीं, पानी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निजी कुओं के अधिग्रहण हेतु 1 करोड़ 1 लाख 77 हजार रुपये की राशि आरक्षित रखी गई है, जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी गांव में पीने के पानी की बाणी न होने पाए।
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प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, जिले के उन क्षेत्रों की पहचान कर ली गई है जहां हर साल पानी की भारी कमी होती है। इस बार मानसून अच्छा होने के बावजूद प्रशासन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। यही कारण है कि 14 महत्वपूर्ण नल-जल योजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि टैंकरों पर निर्भरता कम की जा सके।
प्रभावित क्षेत्रः 1,084 गांव और ढाणियां, टैंकरों का
नियोजनः 162 टैंकर सज्ज रहेंगे। कुल
प्रस्तावित बजटः 7.38 करोड़ रुपये।
प्राथमिकताः निजी विहिरी अधिग्रहण और रुकी हुई जल योजनाओं को पूरा करना।