नासिक रिंगरोड पर नया मोड़: किसान तैयार, पर अलाइनमेंट बदलो; 25 गांवों की एक शर्त
Nashik Ring Road: सिंहस्थ कुंभ के लिए प्रस्तावित 65 किमी रिंगरोड पर भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान तैयार हैं, लेकिन मौजूदा अलाइनमेंट बदलने की शर्त रखी है। रसूखदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Simhastha Kumbh Land Acquisition: नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर प्रस्तावित 65 किलोमीटर लंबे बाहरी रिंगरोड के लिए भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर अब एक नया मोड़ आया है। जिले के लगभग सभी 25 गांवों के किसान प्रोजेक्ट के महत्व को समझते हुए जमीन देने को तैयार हो रहे हैं, लेकिन उनकी एक प्रमुख और अनिवार्य शर्त अलाइनमेंट (नक्शा) को बदलना है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान रूट से उनका भारी व्यक्तिगत और आर्थिक नुकसान हो रहा है। रसूखदारों को फायदा? किसानों ने रिंगरोड के रूट को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
किसानों का दावा है कि विंचूरगवली, देवलाली, विल्होली और गोवर्धन जैसे गांवों में राजनेताओं, सरकारी अधिकारियों और बड़े व्यवसायियों को लाभ पहुंचाने के लिए अलाइनमेंट को बदला गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान नक्शे की वजह से कई लोगों के पुश्तैनी घर टूट रहे हैं और छोटे किसान पूरी तरह भूमिहीन हो रहे हैं।
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मुआवजे की ‘डेडलाइन’ ने बढ़ाया तनाव
अडगांव क्षेत्र में ग्रीन जोन से 60 मीटर चौड़ी अलाइनमेंट पहले ही तय कर जमीन मालिकों को टीडीआर के रूप में मुआवजा दिया जा चुका है, तो अन्य जगहों पर बदलाव क्यों? जिलाधिकारी ने किसानों के सामने एक सख्त समयसीमा रखी है।
इसके तहत 5 फरवरी तक सहमति देने वाले किसानों को मुआवजे की 5 गुना राशि दी जाएगी। इसके बाद सहमति देने पर 25 प्रतिशत की कटौती का सामना करना पड़ सकता है। इस ‘डेडलाइन’ के कारण किसानों में भारी बेचैनी है, जिसके चलते वे पुरानी अलाइनमेंट को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
जिलाधिकारी का स्पष्टीकरण
- शुक्रवार को गोवर्धन ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी आयुष प्रसाद से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई।
- जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया उनके कार्यक्षेत्र में है, लेकिन सड़क के रूट और अलाइनमेंट की जिम्मेदारी एमएसआईडीसी की है।
- उन्होंने ग्रामीणों को सलाह दी कि नक्शे में सुधार के लिए मुंबई स्थित राज्य स्तरीय कार्यालय में अपील करनी होगी, क्योंकि बदलाव का अधिकार उन्हीं के पास सुरक्षित है।
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ग्रामीणों का कड़ा रुख
गोवर्धन जैसे पैसा (पीईएसए) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों के निवासियों ने चेतावनी दी है कि वे विकास के विरोधी नहीं है, लेकिन अलाइनमेंट के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार और उनके बेघर होने को स्वीकार नहीं करेंगे। किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल अब जल्द ही मुंबई में सबंधित मंत्रियों और विभाग प्रमुखों से मिलने की तैयारी कर रहा है।
