

Nashik Simhastha Kumbh 2027: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के लिए राज्य सरकार ने 2012 बैच के आईएएस अधिकारी शेखर सिंह को अक्टूबर 2025 में कुंभ मेला आयुक्त नियुक्त किया था। उनकी नियुक्ति को 11 महीने बीत चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कुंभ मेले से जुड़े विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया। हालांकि, काम की रफ्तार बढ़ने के बावजूद जनता, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और साधु-महंतों के साथ संवाद अपेक्षाकृत कम रहा। इससे उनकी कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती गई। अब इस नाराजगी को दूर करने के लिए शेखर सिंह ने डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है।
कुंभ मेले की तैयारियों के लिए हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य शुरू हैं। सड़क, यातायात, जलापूर्ति, स्वच्छता, स्वास्थ्य और श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न सुविधाओं के निर्माण के दौरान नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क खुदाई, यातायात जाम, भूमि अधिग्रहण और विभिन्न विकास कार्यों को लेकर प्रशासन की ओर से पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने से नागरिकों में नाराजगी पैदा हुई। इसका असर कुंभ मेला आयुक्त की छवि पर भी पड़ा।
इस नाराजगी को देखते हुए सिंह ने अब संवाद का रास्ता अपनाया है। कुछ दिन पहले उन्होंने पत्रकारों के साथ बैठक कर कुंभ मेले की तैयारियों पर चर्चा की। इसके बाद मंगलवार को नासिक महानगरपालिका के नगरसेवकों के साथ संवाद कर उनकी राय और सुझाव जाने। इससे पहले उन्होंने नासिक के विधायकों के साथ भी बैठक की थी। इससे स्पष्ट है कि अब तक प्रशासनिक स्तर पर चल रही तैयारियों को जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू हो गई है।
कुंभ मेले के धार्मिक स्वरूप को देखते हुए साधु-महंतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, साधु-महंतों में भी प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी होने की चर्चा है। पत्रकारों, विधायकों और नगरसेवकों के साथ संवाद के बाद अब साधु-महंतों के साथ समन्वय स्थापित करना सिंह के सामने बड़ी चुनौती होगी। अखाड़ों की सुविधाएं, धार्मिक स्थलों पर व्यवस्थाएं और कुंभ मेले की योजना में साधु-महंतों की भागीदारी पर प्रशासन को विशेष ध्यान देना होगा।
2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए पहली बार स्वतंत्र प्राधिकरण का गठन किया गया है। करीब 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी शेखर सिंह के कंधों पर है। सड़क, यातायात, जलापूर्ति, स्वच्छता, स्वास्थ्य, आवास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के साथ ही भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन व्यवस्था और भगदड़ रोकने के लिए प्रभावी योजना बनाना भी जरूरी होगा। शेखर सिंह को प्रशासन का लंबा अनुभव है। इससे पहले वे पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के आयुक्त के रूप में भी काम कर चुके हैं।
हालांकि, सिंहस्थ का स्वरूप केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक महत्व भी है। ऐसे में विकास की रफ्तार के साथ सभी वर्गों से संवाद बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी कसौटी होगी। आने वाले समय में नाराजगी दूर कर सभी को विश्वास में लेने में वे कितने सफल होते हैं, इस पर नासिक की नजरें टिकी हैं।