अखाड़ा परिषद में वर्चस्व की लड़ाई, अध्यक्ष पद को लेकर बढ़ा विवाद, 2015 का इतिहास दोहराने की आशंका

Simhastha Kumbh Mela 2027: नासिक सिंहस्थ 2027 से पहले अखाड़ा परिषद में अध्यक्ष पद को लेकर विवाद बढ़ गया है। दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज होने से 2015 का इतिहास दोहराने की आशंका है।
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नासिक सिंहस्थ 2027 (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Akhada Parishad President Dispute: नासिक में सिंहस्थ के दौरान बैरागी और संन्यासी अखाड़ों के बीच विवाद और संघर्ष का इतिहास सदियों पुराना है। वर्ष 2015 के नासिक सिंहस्थ के दौरान भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर महंत ज्ञान दास और महंत नरेंद्र गिरि के बीच काफी खींचतान हुई थी। बाद में महंत नरेंद्र गिरि को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष माना गया था। अब वर्ष 2027 में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होना है और 2026 में धर्मध्वजा की स्थापना की तैयारी है। ऐसे में अखाड़ा परिषद में एक बार फिर अध्यक्ष पद को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। मौखिक विवाद अब टकराव की स्थिति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इससे सवाल उठने लगा है कि क्या नासिक एक बार फिर 2015 का इतिहास दोहराने के कगार पर है?

नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले को दिव्य और भव्य बनाने के लिए महाराष्ट्र और केंद्र सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। 30 और 31 अक्टूबर को धर्मध्वजा की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले का औपचारिक आगाज होगा। हालांकि, अखाड़ा परिषद में लगातार गहराते विवादों के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि धर्मध्वजा स्थापना कार्यक्रम और आगामी सिंहस्थ का आयोजन अखाड़ा परिषद के किस अध्यक्ष की अध्यक्षता में होगा। फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है।

नासिक में फिर आमने-सामने अखाड़े

अखाड़ा परिषद के दोनों गुट अपने-अपने वर्चस्व की लड़ाई प्रयागराज से लेकर हरिद्वार तक लड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अखाड़ा परिषद में चाहे कितना भी विवाद हो, अध्यक्ष पद का अंतिम फैसला कुंभ के दौरान ही होता रहा है। वर्ष 2015 के नासिक सिंहस्थ में भी महंत ज्ञान दास और महंत नरेंद्र गिरि के बीच अध्यक्ष पद को लेकर विवाद का फैसला हुआ था। उस समय महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन ने महंत नरेंद्र गिरि को अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के रूप में स्वीकार किया था।

2015 दोहराने का डर

इस बार स्थिति कुछ अलग है। यह लड़ाई संन्यासी बनाम बैरागी की नहीं, बल्कि संन्यासी अखाड़ों के दो प्रमुख अखाड़ों-निरंजनी अखाड़ा और महानिर्वाणी अखाड़ा-के बीच दिखाई दे रही है। एक ओर निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी हैं, जबकि दूसरी ओर महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी हैं। वर्तमान अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी 9 अखाड़ों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। वहीं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी 8 अखाड़ों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज होती दिखाई दे रही है।

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नासिक सिंहस्थ से पहले बढ़ी हलचल

अखाड़ा परिषद का विवाद अब अन्य अखाड़ों तक भी पहुंचता नजर आ रहा है। नया उदासीन और बड़ा उदासीन में पहले से ही दो-दो गुट आमने-सामने हैं। अब निर्मोही अखाड़े में भी दो गुटों के सक्रिय होने की खबर सामने आ रही है। एक ओर महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी के साथ अखाड़े के अध्यक्ष राजेंद्र दास बताए जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर एक अन्य अध्यक्ष के सामने आने की बात कही जा रही है, जो निरंजनी अखाड़े के सचिव के साथ हैं। अखाड़ा परिषद में बढ़ते विवाद को देखते हुए इतना तय माना जा रहा है कि आगामी नासिक सिंहस्थ कुंभ अखाड़ों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प होने वाला है। आने वाले समय में अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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