Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

पेशवा काल की परंपरा, नासिक में रंगपंचमी की तैयारी चरम पर, पंचवटी-भद्रकाली की रहाड़ का काम शुरू

Nashik Rahad Tradition: नासिक में रंगपंचमी के लिए पेशवा काल से चली आ रही ‘रहाड़’ परंपरा की तैयारी शुरू हो गई है। पंचवटी और भद्रकाली क्षेत्रों में जमीन के नीचे दबी रहाड़ को खोदकर निकाला जा रहा है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Mar 09, 2026 | 02:35 PM

Nashik Rangpanchami Festival ( सोर्स : शोसल मीडिया )

Follow Us
Close
Follow Us:

Nashik Rangpanchami Festival: नासिक शहर की ऐतिहासिक पहचान और पेशवा काल से चली आ रही ‘रहाड़’ परंपरा का उल्लास अब अपने चरम पर पहुंचने वाला है। होली और धुलिवंदन के बाद आने वाली रंगपंचमी के लिए पुराने नासिक (भद्रकाली) और पंचवटी क्षेत्र की प्रसिद्ध रहाड़ को मिट्टी से खोदकर निकालने का काम उत्साह के साथ शुरू हो गया है।

सैकड़ों वर्षों की इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देशभर से पर्यटक नासिक पहुंचते हैं। ‘रहाड़’ दरअसल जमीन के अंदर बना एक विशाल हौद (टैंक) होता है। मान्यता है कि यह परंपरा पेशवा काल से शुरू हुई थी। साल भर ये रहाड़ मिट्टी के नीचे दबी रहती हैं, लेकिन रंगपंचमी से लगभग एक सप्ताह पहले इन्हें पूरी श्रद्धा और कड़ी मेहनत के साथ खोदकर बाहर निकाला जाता है।

नासिक में मुख्य रूप से पंचवटी और भद्रकाली क्षेत्रों की रहाड़ विश्व प्रसिद्ध हैं। पंचवटी में शनि चौक, तिवंधा चौक और दिल्ली दरवाजा क्षेत्र की रहाड़ है। भद्रकाली में चौक मंडई, तांबट गली और पुराने नासिक की प्रतिष्ठित रहाड़ है।

सम्बंधित ख़बरें

सिवेज ट्रीटमेंट की फर्जी कंपनी में ठाणे मनपा का करोड़ों रुपया, गलत तरीके से बिलों की वसूली

भंडारा में संदिग्ध कार से धारदार चाकू बरामद, तीन युवक गिरफ्तार

गोंडपिपरी में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक से भिड़ी बाइक, 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत

इमारतों की ओसी पर सरकार का फैसला, सर्वे के बाद रहिवासियों को मिलेंगी नियमित पानी व अन्य सुविधाएं

प्रत्येक रहाड़ का अपना एक गौरवशाली इतिहास है और इनका रखरखाव विशिष्ट तालिम या मंडलों द्वारा किया जाता है। रहाड़ उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राकृतिक रंग है। प्राचीन काल में पलाश (टेसू) के फूलों से तैयार किया गया केसरिया पानी इन रहाड़ों में भरा जाता था। आज भी कई स्थानों पर रासायनिक रंगों से बचकर पारंपरिक तरीके से तैयार रंगों के उपयोग पर जोर दिया जाता है।

ऐतिहासिक, चार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए मशहूर येवला शहर में रंगपंचमी का एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। यहां की सबसे खास बात है।

‘रंगों का मुकाबला (रंगाचे सामने), जिसकी परंपरा पिछले 200 वर्षों से चली आ रही है, येवला को पुराने समय से ही ‘पहलवानों का गांव कहा जाता है। शहर में अखाड़ा (तालमी) की संख्या बहुत अधिक थी, और बुजुर्गों के अनुसार, इन अखाड़ों की पहल पर ही रंगों के इन मुकाबलों की शुरुआत हुई थी, बीच में कुछ कारणों से यह परंपरा रुक गई थी, लेकिन 1996 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्षा सुंदराबाई लोणारी, भोलानाथ लोणारी, प्रभाकर झलके और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने प्रशासन की अनुमति से उसे पुनजीवित किया।

इस मुकाबले में शहर के विभिन्न अखाड़े और गणेश मंडल बड़े उत्साह के साथ भाग लेते हैं। पहला मुकाबला शाम 5 बजे तिलक मैदान और दूसरा डी. जी. रोड पर होता है। पहले इन मुकाबलों में बैल गाड़ियों का इस्तेमाल होता था, जिनकी जगह अब ट्रैक्टरों ने ले ली है। ट्रैक्टरों पर रंगों से भरे इम लेकर कार्यकर्ता चौराहों पर जमा होते हैं।

यह भी पढ़ें:-सिंहस्थ कुंभ की तैयारी, त्र्यंबकेश्वर में 275 करोड़ के विकास कार्य शुरू; श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाए

जैसे ही मुकाबला शुरू होता है, दोनों ओर से एक-दूसरे पर रंगों की बौछार की जाती है, जो किसी रंग युद्ध’ जैसा प्रतीत होता है। श्री बालाजी मंदिर। वहीं के प्राचीन श्री बालाजी मंदिर में पहले पांच दिनों तक उत्सव चलता था, जो अब एक दिन होता है। परंपरा के अनुसार, ‘नगर शेठ’ भगवान बालाजी के साथ रंग खेलते हैं।

ऐतिहासिक ‘रहाड़’ और शावर बाथ भी हुआ तैयार

नाशिवा शहर और पूरे जिले मे रविवार, 8 मार्च को ‘रंगपंचमी’ का पर्व बड़े ही उत्साह और उमग के साथ मनाया जाएगा। होली के बाद आने वाले इस रंगों के उत्सव को लेकर नासिक वासियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शहर के विभिन्न मंडलों और रहाड़ प्रेमियों ने इस उत्सव के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

नासिक की रंगपंचमी अपनी सदियों पुरानी ‘रहाड़’ परंपरा के लिए विश्य प्रसिद्ध है। शहर के पुराने हिस्सों (पेठ इलाकों) में स्थित इन ऐतिहासिक कुंडों (रहाड़) को साफ कर उन्हें रंग खेलने के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया गया है।

साथ ही, आधुनिकता का तड़का लगाते हुए काई इलाकों में शावर रंगपंचमी (कृत्रिम बौछार) का भी भव्य नियोजन किया गया है, जहाँ संगीत की धुन पर लौग रंगों का आनंद ले सकेंगे, उत्सव के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नासिक शहर और ग्रामीण पलिस प्रशासन परी तरह मस्तैद है।

Nashik rahad tradition rangpanchami peshwa era panchvati bhadrakali

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Mar 09, 2026 | 11:28 AM

Topics:  

  • Latest Hindi News
  • Maharashtra
  • Maharashtra News
  • Nashik
  • Nashik News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.