आंतरिक ट्रैफिक से राहत: कुंभ से पहले रिंग रोड तैयार करने पर जोर, 8 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट
Nashik Ring Road: नासिक में प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग के चार चरणों के टेंडर खुल गए हैं। करीब 8 हजार करोड़ की इस परियोजना को NHAI फंड देगा। रिंग रोड बनने से शहर के भीतर ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Infrastructure Development: नासिक शहर की आंतरिक यातायात व्यवस्था को मजबूत करने और आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रस्तावित ‘नासिक परिक्रमा मार्ग’ के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है।
एमएसआरडीसी ने दिसंबर 2025 में इस परियोजना के लिए सात चरणों में निविदाएं आमंत्रित की थीं, जिनमें से चार चरणों के तकनीकी टेंडर अब खोल दिए गए हैं। इन चार चरणों के लिए कुल आठ प्रतिष्ठित कंपनियों ने अपनी रुचि दिखाई है।
परियोजना का हस्तांतरण और फंडिंग शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के पास थी, लेकिन भारी बजट के कारण इसे एमएसआरडीसी को सौंप दिया गया।
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इस विशाल परियोजना के लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट के लिए फंड देने की तैयारी दिखाई है, जिससे काम की राह आसान हो गई है।
रिंग रोड बन जाने से भारी वाहन शहर के बाहर से ही निकल सकेंगे, जिससे शहर के भीतर की ट्रैफिक जाम की समस्या स्थायी रूप से खत्म हो जाएगी।
प्रमुख चरणों का विवरण (करोड़ रुपये)
दूसरा चरण: 13.800 किमी (लागत 662)
चौथा चरण: 7.640 किमी (लागत: 345.10)
छठा चरण: 14 किमी ( लागत: 558.58)
सातवां चरण: 10.730 किमी (लागत: 484.67)
इन चरणों के लिए मिली निविदाएं
एमएसआरडीसी के सूत्रों के अनुसार, अभी तक जिन चरणों के टेंडर खुले हैं, उनमें प्रमुख कंपनियों जैसे जीआर इन्ाप्रोजेक्ट्स, व्हीएच खत्री कन्स्ट्रक्शन और एएस देसाई इन्ग्रास्ट्रक्चर ने बोली लगाई है।
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दूसरे चरण (13.8 किमी) के लिए 662 करोड, चौथे चरण (7.6 किमी) के लिए 345 करोह, छठे चरण 14 किमी) के लिए 558 करोड़ और सातवें चरण (10.7 किमी) के लिए 484 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित है। इन सभी निविदाओं की अब तकनीकी और आर्थिक जांच की जाएगी।
9 फरवरी को खुलेगा अगला टेंडर
परियोजना के शेष तीन चरणों (टप्पा 1, 3 और 5) के लिए टेंडर 9 फरवरी को खोले जाएंगे। इसके बाद सभी आवेदनों की गहन छाननी की जाएगी और पात्र ठेकेदारों की नियुक्ति की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर इसी वर्ष (2026) के भीतर निमर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए।
