कीमतों में 50% से अधिक गिरावट से ‘डिस्ट्रेस सेल’ की स्थिति, नासिक के प्याज उत्पादक किसानों की बढ़ी चिंता
Nashik Onion Farmers Crisis: नासिक में प्याज की कीमतें 300 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरने से किसान संकट में हैं। किसान संगठन ने सरकार से बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने की मांग की है।
- Written By: अंकिता पटेल
Onion Price Crash Maharashtra( Source: Social Media )
Onion Price Crash Maharashtra: नासिक महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसान वर्तमान में अभूतपूर्व आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। कृषि उपज मंडी समितियों में प्याज की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कई स्थानों पर प्याज का औसत भाव महज 300 से 800 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जो उत्पादन लागत के आधे से भी कम है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने सरकार को ईमेल के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन भेजकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया है।
प्याज की उत्पादन लागत 1500 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल है। मौजूदा कीमतों में किसानों के लिए कटाई और परिवहन का खर्च निकालना भी असंभव हो गया है।
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चूंकि कीमतों में 50% से अधिक की गिरावट आई है, इसलिए यह स्पष्ट रूप से ‘डिस्ट्रेस सेल’ (संकटपूर्ण बिक्री) की स्थिति है। यह केंद्र सरकार की बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने की अनिवार्य शर्तों को पूरा करती है।
संगठन की प्रमुख मांगें
भारत दिघीले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की मांग की है। राज्य सरकार केंद्र को बाजार हस्तक्षेप योजना के लिए तत्काल प्रस्ताव भेजे।
यह योजना केवल जिला स्तर तक सीमित न रहकर प्रत्येक प्याज उत्पादक तहसील स्तर पर लागू की जाए, प्रत्येक संबंधित तहसील में सरकारी खरीद केंद्र शुरू किए जाएं ताकि किसानों को बिचौलियों से राहत मिले।
उत्पादन लागत के आधार पर एक सम्मानजनक न्यूनतम खरीद दर निधर्धारित की जाए। ‘प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट’ प्रभावी ढंग से लागू कर अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाए।
सरकार से तीखे सवाल
भारत दिघोले ने सीधा सवाल उठाया है कि जब केंद्र की योजना उपलब्ध है और कीमतें लागत से नीचे गिर चुकी है, तो राज्य सरकार अब तक मूकदर्शक क्यों बनी हुई है? उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस योजना को तुरंत लागू कर किसानों को राहत नहीं दी गई, तो पूरे राज्य में तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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जब किसान की लागत भी नहीं निकल रही, तो सरकार की चुप्पी समझ से परे है। बाजार हस्तक्षेप योजना ही एकमात्र रास्ता है जी प्याज उत्पादकों की आत्महत्या की दहलीज से वापस ला सकता है।
-अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन, भारत दिघोले
