Nashik: नन्हें मुन्नों के लिए ‘वरदान’ बना जिला अस्पताल, 1,596 मासूमों की बची जान
Nashik District Hospital की विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) ने 2025 में 1,596 बीमार और कमजोर शिशुओं की जान बचाई। आधुनिक इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी से शिशु मृत्यु दर घटाने में बड़ी सफलता मिली।
- Written By: अपूर्वा नायक
नासिक जिला अस्पताल (सौ. सोशल मीडिया )
Nashik News In Hindi: जिला सरकारी अस्पताल में संचालित ‘विशेष नवजात देखभाल इकाई’ (SNCU) बीमार और कमजोर शिशुओं के लिए संजीवनी साबित हो रही है। 1 अप्रैल से 15 दिसंबर 2025 के बीच इस इकाई के माध्यम से कुल 1,596 शिशुओं का सफलतापूर्वक उपचार किया गया है।
जिला शल्य चिकित्सक डॉ. चारुदत्त शिंदे, अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक डॉ. नीलेश पाटिल और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश गोरे ने यह जानकारी साझा की। शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से यह विशेष पहल शुरू की गई है। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे देशभर में लागू किया गया।
उच्च जोखिम वाले शिशुओं का होता है इलाज
नासिक जिले में जिला अस्पताल के अलावा मालेगांव के सरकारी महिला अस्पताल, कलवण और त्र्यंबकेश्वर के उपजिला अस्पतालों में भी यह सुविधा उपलब्ध है। इन केंद्रों पर आधुनिक मशीनरी और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है ताकि शिशुओं को त्वरित उपचार मिल सके।
सम्बंधित ख़बरें
Kark Sankranti 2026: जुलाई में कब है कर्क संक्रांति? नोट करें डेट, पुण्य और महापुण्य काल
नासिक में संत निवृत्तिनाथ महाराज पालकी यात्रा को लेकर ट्रैफिक रूट बदला, 3 जुलाई तक रहेगा डायवर्जन
Navabharat Nishanebaaz: बातचीत में जमा ना खर्चा, हो जाए मंदिर पर चर्चा
नासिक-मुंबई हाईवे पर फुटओवर ब्रिज के नीचे फंसा कंटेनर, कई घंटे यातायात ठप, सड़क निर्माण से बढ़ी ऊंचाई बनी आफत
इन विशेष कक्षों में न केवल नासिक बल्कि अन्य जिलों से आने वाले ‘हाई रिस्क’ वाले शिशुओं को भी भर्ती किया जाता है। उपचार की मुख्य विशेषताएं और सुविधाएं निम्नलिखित हैं- दो से ढाई किलोग्राम वजन वाले शिशुओं के लिए विशेष देखभाल प्रदान की जाती है।
37 सप्ताह से पहले जन्मे बच्चे, निमोनिया, पीलिया, संक्रमण, सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों की कमजोरी (हायलाइन मेम्ब्रेन डिजीज) जैसी गंभीर समस्याओं का यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज होता है। अस्पताल में जन्मे बच्चों के साथ-साथ बाहर से रेफर होकर आने वाले बच्चों के लिए अलग-अलग वार्ड की व्यवस्था है, ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।
गर्भावस्था में सावधानी और मां का पोषण
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने शिशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए माता के स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया है। जिला शल्य चिकित्सक डॉ. चारुदत्त शिंदे के अनुसार, यदि मां का पोषण और आहार अच्छा हो, तो शिशुओं को जन्मजात बीमारियों से बचाया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान परिवार को मां के खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए और समय-समय पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
ये भी पढ़ें :- Navi Mumbai में शिंदे गुट को मजबूती, ठाकरे गुट और कांग्रेस के 5 पूर्व नगरसेवक शामिल
निःशुल्क उपचार और सामाजिक जिम्मेदारी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश गोरे ने बताया कि इस कक्ष के माध्यम से शिशुओं का पूर्णतः निःशुल्क उपचार किया जाता है। स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए समाज को बाल विवाह जैसी कुरीतियों से बचना चाहिए क्योंकि कम उम्र में मां बनने से शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। अस्पताल का यह विशेष कक्ष उच्च जोखिम वाले शिशुओं की जान बचाने के लिए सदैव तत्पर है।
