नासिक मनपा चुनाव: BJP को बड़ा झटका, अपनों की अनदेखी का आरोप, अमित घुगे निर्दलीय चुनाव लड़ेगे

Ticket Distribution: नासिक मनपा चुनाव से पहले BJP को झटका लगा है। शहर महासचिव अमित घुगे ने टिकट वितरण में पक्षपात का आरोप लगाते हुए अपक्ष चुनाव लड़ने का ऐलान किया।
Nashik Municipal Corporation elections: BJP suffers a major setback, accused of neglecting its own members; Amit Ghuge will contest as an independent candidate
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Municipal Election: नासिक महानगरपालिका चुनाव की गहमागहमी के बीच भारतीय जनता पार्टी को अपनों की नाराजगी का बड़ा झटका लगा है।

पार्टी के शहर महासचिव अमित घुगे ने प्रभाग क्रमांक 1 से निर्दलीय (अपक्ष) उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी और टिकट वितरण में पक्षपात करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

'भाजपा मेरी मां, लेकिन अन्याय बर्दाश्त नहीं'

एक पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए अमित घुगे ने अपनी 20 वर्षों की राजनीतिक यात्रा और वर्तमान पीड़ा को विस्तार से साझा किया। घुगे ने कहा कि उन्होंने युवा मोर्चा से लेकर शहर महासचिव पद तक पूरी ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाई है, लेकिन उन्हें बार-बार नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष प्रस्तुत किए गए सर्वे रिपोर्ट में हेरफेर की गई है। घुगे का दावा है कि वे हर सर्वे में पहले स्थान पर थे।

उन्होंने सवाल उठाया कि एक ओर जहां उनकी दावेदारी मजबूत थी, वहीं दूसरी ओर पार्टी ने 70 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को पांचवीं बार मौका दिया है।

अमित घुगे ने अपनी नाराजगी के लिए स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। घुगे ने दावा किया कि उन्होंने शहर अध्यक्ष और संबंधित विधायकों को 15 बार फोन किया, लेकिन किसी ने जवाब देना उचित नहीं समझा।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रभागों में एक ही परिवार के दो लोगों को टिकट दिए गए हैं, जबकि उनके जैसे समर्पित कार्यकर्ता को अपमानित किया गया।

'अंदरूनी घमासान' से चुनावी माहौल गर्म

  • अमित घुगे के इस कदम से प्रभाग क्रमांक 1 का मुकाबला अब त्रिकोणीय और बेहद रोचक हो गया है। घुगे ने कहा कि वे चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और मतदाताओं का बड़ा समर्थन उनके साथ है।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक रूप से भी दे मजबूत है और कार्यकर्ता स्वयं उनके लिए खर्च उठाने को तैयार है। भाजपा के भीतर उभरा यह असंतोष केवल प्रभाग 1 तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पार्टी की 'एकजुटता' वाली छवि को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है।
  • अब देखना यह होगा कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस 'डैमेज' को कैसे कंट्रोल करता है।
  • उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देते हुए स्पष्ट किया कि इस बगावत का सीधा संबंध गिरीश महाजन से नहीं, बल्कि स्थानीय विधायकों की कार्यप्रणाली से है।
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