BJP Shiv Sena Nashik (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Municipal Corporation: महापौर और उपमहापौर के चुनाव संपन्न होने के बाद अब नासिक महानगरपालिका में सत्ता का दूसरा बड़ा संघर्ष स्थायी समिति के गठन को लेकर शुरू हो गया है। आर्थिक निर्णय, कर प्रस्ताव और विकास कार्यों पर नियंत्रण की चाबी इसी समिति के पास होने के कारण इसकी 16 सीटों पर कब्जा जमाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच जोरदार खींचतान चल रही है।
महानगरपालिका का बजट, निविदाएं (टेंडर), सड़क और जल परियोजनाएं, साथ ही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई जैसे सभी अहम प्रस्ताव स्थायी समिति के माध्यम से ही पारित होते हैं। यही वजह है कि इस समिति में स्थान पाना पार्षदों के लिए प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है। कई पार्षद अपने वरिष्ठ नेताओं और गटनेताओं के माध्यम से सक्रिय रूप से लॉबिंग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि भाजपा की हिमगौरी आहेर-आडके महापौर और शिवसेना (शिंदे गुट) के विलास शिंदे निर्विरोध उपमहापौर चुने जा चुके हैं। इसके बाद अब सभी की निगाहें स्थायी समिति के सभापति पद पर टिकी हुई हैं।
स्थायी समिति के कुल 16 सदस्यों का चयन दलीय संख्याबल के आधार पर किया जाएगा। वर्तमान समीकरणों के अनुसार भाजपा को 10, शिवसेना (शिंदे) को 3, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) को 1 सीट मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था।
हालांकि, तकनीकी गणना में अब बड़ा बदलाव सामने आया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के पास पहले 26 पार्षद थे, जिससे उनका तार्किक अनुपात 3.41 बैठता था और उन्हें 3 सीटें मिलती थीं। लेकिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की एक महिला पार्षद द्वारा शिंदे गुट की ‘शहर विकास आघाड़ी’ को समर्थन देने से उनकी संख्या बढ़कर 27 हो गई है। इसके चलते उनका तार्किक अनुपात बढ़कर 3.54 हो गया है। घटते क्रम की गणना के अनुसार, इस बढ़े हुए अनुपात से शिंदे गुट को अब तीन के बजाय चार सीटें मिलने की प्रबल संभावना बन गई है।
ये भी पढ़े: ग्रामीण सत्ता का गणित: संभाजीनगर पंचायत समितियों में बीजेपी-शिवसेना का दबदबा
16 सदस्यों की नियुक्ति के बाद स्थायी समिति के सभापति पद के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। यह चुनाव केवल समिति गठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्ष में नासिक मनपा की वास्तविक सत्ता और प्रशासनिक दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला साबित होगा।