Standing Committee members Nashik (सोर्सः सोशल मीडिया)
Standing Committee Members Nashik: नासिक महानगरपालिका की स्थायी समिति के 16 सदस्यों की नियुक्ति सोमवार को महासभा में घोषित की गई। विभिन्न दलों के गुटनेताओं द्वारा सुझाए गए नामों पर महासभा में मुहर लगाई गई। महापौर हिमगौरी आडके और उपमहापौर विलास शिंदे की उपस्थिति में आयोजित बैठक में जैसे ही सदस्यों के नामों की घोषणा हुई, उनका सभागार में अभिनंदन किया गया। भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने चर्चा में रहे कई प्रमुख नामों को दरकिनार करते हुए नए चेहरों को मौका दिया।
महानगरपालिका के वित्तीय कामकाज पर नियंत्रण रखने वाली और ‘तिजोरी की चाबी’ मानी जाने वाली इस समिति में स्थान पाने के लिए कई इच्छुकों ने जोरदार प्रयास किए थे। प्रमुख दलों के बीच अंतिम क्षण तक बैठकों और मंथन का दौर चलता रहा। महासभा शुरू होने से कुछ ही मिनट पहले गुटनेताओं ने अंतिम सूची महापौर को सौंपी, जिसके बाद नामों की औपचारिक घोषणा की गई।
16 सदस्यों में से चार नाम पहले से चर्चा में थे और उनकी नियुक्ति बरकरार रही, जबकि शेष 12 नाम चर्चा में नहीं थे। फिर भी उन्हें अवसर दिए जाने से राजनीतिक हलकों में आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। इनमें कुछ नए चेहरों को पहली बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सभागार में संख्या बल के आधार पर स्थायी समिति में भाजपा को 9, शिवसेना (शिंदे गुट) को 4, शिवसेना (ठाकरे गुट) को 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) को 1 सीट मिली है।राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) व अपक्ष आघाड़ी की ओर से गुटनेता सीमा रंजन ठाकरे ने अपक्ष उम्मीदवार मुकेश शहाणे के नाम की सिफारिश की। शिवसेना (ठाकरे गुट) के गुटनेता केशव पोरजे ने भारती ताजनपुरे और योगेश गाडेकर के नाम प्रस्तावित किए।
शिवसेना (शिंदे गुट) व मनसे आघाड़ी की ओर से गुटनेता अजय बोरस्ते ने मनसे की माधुरी पवार, किरणताई गामणे-दराडे, राहुल दिवे और रंजनाताई बोराडे के नाम सुझाए। वहीं भाजपा के गुटनेता श्याम बडोदे ने माधुरी गणेश बोलकर, नितीन निगळ, पल्लवी गणोरे, डॉ. दिपाली कुलकर्णी, इंदुबाई खेताडे, सरिता सोनवणे, आदिती पांडे, मच्छिंद्र सानप और जयश्री गायकवाड के नामों की सिफारिश की। गुटनेताओं की सिफारिश के बाद महासभा में सभी नामों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई।
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स्थायी समिति की चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभापति पद के चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं। बजट मंजूरी, निविदा प्रक्रिया और बड़े विकास कार्यों को स्वीकृति देने जैसे महत्वपूर्ण अधिकार इस समिति के पास होते हैं, इसलिए सभापति पद को विशेष महत्व प्राप्त है। सत्ताधारी दल किसे यह जिम्मेदारी सौंपेगा, इसे लेकर एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। नई समिति से पारदर्शी कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में तेजी लाने की अपेक्षा जताई जा रही है। आगामी बजट सत्र में सदस्यों की कार्यशैली की पहली परीक्षा मानी जा रही है।