मालेगांव की डिप्टी मेयर के ऑफिस में लगी टीपू सुल्तान की तस्वीर व सपा नेता अबू आजमी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Abu Azmi Statement On Tipu Sultan Controversy: महाराष्ट्र के मालेगांव में एक बार फिर ऐतिहासिक हस्तियों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। यह नया विवाद तब शुरू हुआ जब मालेगांव नगर निगम के डिप्टी मेयर के कार्यालय में टीपू सुल्तान की एक तस्वीर लगाई गई। जैसे ही इस तस्वीर की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वैसे ही विभिन्न राजनीतिक दलों और स्थानीय संगठनों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया, जिससे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
शिवसेना के कार्यकर्ताओं और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने सरकारी कार्यालय के भीतर टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने पर कड़ी आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों और कार्यकर्ताओं का तर्क था कि एक विवादास्पद ऐतिहासिक हस्ती की तस्वीर को इस तरह सरकारी दफ्तर में प्रदर्शित करना अनुचित है और इससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है। राज्यसभा सांसद और शिवसेना नेता संजय राउत सहित कई अन्य नेताओं ने भी इस कदम का खुलकर विरोध किया। विपक्ष का मुख्य तर्क यह था कि नागरिक कार्यालयों के भीतर इस तरह की कार्रवाई अनावश्यक तनाव पैदा करती है।
इस पूरे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी (SP) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी तस्वीर के समर्थन में मजबूती से उतरे। उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए इस कदम का बचाव किया। आजमी ने कहा कि हमारा देश संविधान के अनुसार चलता है और संविधान की मूल पुस्तक में रानी लक्ष्मीबाई के साथ-साथ टीपू सुल्तान की भी तस्वीरें उनके विवरण के साथ मौजूद हैं।
मुजाहिदे आज़ादी हज़रत टीपू सुलतान क्रूर थे, लेकिन अंग्रेज़ों के लिए। संविधान में रानी लक्ष्मी बाई के साथ उनकी तस्वीर है। उनका इतिहास सिर्फ हमारे देश में नहीं, पूरी दुनिया में लिखा हुआ है, जो मिटाया नहीं जा सकता। उनके बारे में जानना है तो इतिहास पढ़ना चाहिए। 2024 में बॉम्बे हाई… pic.twitter.com/2IUZxMfMUW — Abu Asim Azmi (@abuasimazmi) February 16, 2026
आजमी ने आगे यह भी याद दिलाया कि 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की अनुमति दी थी, जिसे शुरुआत में सरकार ने रोक दिया था। उन्होंने टीपू सुल्तान के शासनकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके समय में अर्थव्यवस्था अत्यंत मजबूत थी और उन्होंने कई मंदिरों को दान भी दिया था।
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जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन तेज हुए और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका बढ़ी, स्थानीय प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। बढ़ते दबाव और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने अंततः डिप्टी मेयर के कार्यालय से टीपू सुल्तान की तस्वीर को हटा दिया।
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे व्यापक ‘शिवाजी महाराज बनाम टीपू सुल्तान’ तुलना विवाद की कड़ी के रूप में देखी जा रही है, जिसने एक बार फिर ऐतिहासिक पात्रों के सार्वजनिक प्रतिनिधित्व पर राजनीतिक दलों को दो फाड़ कर दिया है।