

Nashik Municipal Corporation: नासिक महानगरपालिका की पांच महत्वपूर्ण विषय समितियों के सभापति पद के चुनाव का रास्ता अब साफ हो गया है। मनपा के नगरसचिव विभाग ने पांचों समितियों के सभापति चुनाव के लिए विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम के पास प्रस्ताव भेज दिया है।
प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब गणेश विसर्जन के बाद इन चुनावों की घोषणा होने की संभावना है। मनपा की महिला एवं बाल कल्याण समिति, शहर सुधार समिति, चिकित्सा सहायता एवं स्वास्थ्य समिति, विधि समिति तथा शिक्षा (स्कूल) समिति इन पांच विषय समितियों के सदस्यों का चुनाव पहले ही निर्विरोध हो चुका है। अब इन समितियों के सभापति का चुनाव कराया जाएगा।
मनपा में मौजूदा संख्याबल को देखते हुए पांचों समितियों के सभापति पद भाजपा के खाते में जाने की संभावना है। ऐसे में भाजपा के भीतर सभापति पद के इच्छुक पार्षदों की सक्रियता बढ़ने के आसार हैं। किस समिति की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
पांचों समितियों के सदस्यों का निर्विरोध चुनाव होने के बाद अब सभापति चुनाव के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। नगरसचिव विभाग की ओर से विभागीय आयुक्त को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद चुनाव की तारीख निश्चित करने का रास्ता भी साफ हो गया है। गणेश विसर्जन के बाद विभागीय आयुक्त की ओर से चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना है।
मनपा की विषय समितियां अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर निर्णय प्रक्रिया में भूमिका निभाती हैं। इसलिए इन समितियों के सभापति पद को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण तथा शहर सुधार जैसे विषयों से संबंधित कार्यों में इन समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
सभापति पद के चुनाव की घोषणा के बाद भाजपा के भीतर इच्छुकों की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। संख्याबल भाजपा के पक्ष में होने के कारण पांचों सभापति पद उसी के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, किस समिति का सभापति पद किस पार्षद को दिया जाएगा, इस पर पार्टी नेतृत्व के निर्णय की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। चुनाव की तारीख घोषित होते ही इच्छुकों की दौड़ और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा और तेज होने की उम्मीद है।
भाजपा गुटनेता एड. शाम बडदे ने कहा कि सभापति पद का चुनाव घोषित होने के बाद संख्याबल को देखते हुए सभी चुनाव निर्विरोध होने की संभावना है। सभापति पद के संबंध में पार्टी जो निर्णय लेगी, वह सभी को मान्य होगा।