मराठवाड़ा के महामार्गों से तत्काल हटेंगे अवैध कब्जे, विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत के कड़े निर्देश

Marathwada Highway Encroachment: मराठवाड़ा के महामार्गों से अवैध पार्किंग व अतिक्रमण हटाने के विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने सख्त निर्देश दिए। कोताही पर होगी कार्रवाई, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट।
marathwada highway illegal encroachment action
विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत(सोर्स: नवभारत फोटो)
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Marathwada Highway Illegal Encroachment Action: छत्रपति संभाजीनगर मराठवाडा के राष्ट्रीय महामार्गों पर अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए अब संबंधित विभागों को सख्त कार्रवाई करनी होगी।

विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने सभी राष्ट्रीय महामार्गों के किनारे मौजूद अवैध ढाबे, होटल, दुकानें और अन्य व्यावसायिक अतिक्रमण तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि महामार्ग सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गुरुवार को हुई बैठक

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप गुरुवार को विभागीय आयुक्त कार्यालय में श्रीकांत की अध्यक्षता में महामार्ग सुरक्षा की समीक्षा बैठक हुई। इसमें छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, हिंगोली, नांदेड, बीड, लातूर और धाराशिव जिलों के जिलाधिकारी, महानगरपालिका आयुक्त, पुलिस अधिकारी, भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण, महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल, नगर परिषद प्रशासन तथा परिवहन विभाग के अधिकारी वीडियो सम्मेलन के माध्यम से शामिल हुए।

सड़क की सीमा में आने वाले अतिक्रमण हटेंगे

श्रीकांत ने कहा कि राष्ट्रीय महामार्ग की निर्धारित सीमा में आने वाले सभी अनधिकृत ढाबे, होटल, दुकानें और अन्य व्यावसायिक निर्माण तत्काल हटाए जाएं। इसके साथ ही मुख्य सड़क और उसके दोनों ओर की अतिरिक्त पक्की पट्टी पर भारी तथा व्यावसायिक वाहनों के अनधिकृत खड़े रहने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए उन्नत यातायात प्रणाली, उपग्रह आधारित निगरानी, चित्र प्रमाण और ई-चालान व्यवस्था का प्रभावी उपयोग करने को कहा गया।

अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों पर तय की जाएगी। कार्रवाई में देरी या लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

हर पखवाड़े होगी समीक्षा

प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला महामार्ग सुरक्षा कार्यदल गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें प्रशासन, पुलिस, राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे। कार्यदल की बैठक हर 15 दिन में होगी। जिलाधिकारी स्वयं महामार्ग के संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की निगरानी करेंगे।

चौबीस घंटे निगरानी पर जोर

महामार्ग सुरक्षा के लिए पुलिस और परिवहन विभाग के स्वतंत्र निगरानी दल गठित किए जाएंगे। इन दलों का राष्ट्रीय महामार्ग के चौबीस घंटे गश्त करने वाले दल के साथ समन्वय रहेगा। महामार्ग पर लगे निगरानी कैमरे, वाहनों की गति मापने वाले उपकरण, चालकों के लिए सूचना देने वाले डिजिटल सूचना पट और आपात स्थिति में नियंत्रण कक्ष से संपर्क की व्यवस्था पूरी तरह कार्यरत रखने के निर्देश दिए गए।

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हर 75 किलोमीटर पर उपचार और क्रेन

हादसा होने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक 75 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक उपचार की सुविधा वाली एंबुलेंस और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए क्रेन उपलब्ध रखने को कहा गया।

इसी दूरी पर ट्रक और अन्य वाहनों के ठहरने की सुविधा भी विकसित करने के निर्देश दिए गए। इन स्थानों पर वाहन खड़ा करने की जगह, विश्राम कक्ष, भोजन, शौचालय और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

दुर्घटना संभावित स्थानों पर विशेष व्यवस्था

दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वहां उच्च क्षमता वाली रोशनी, ऊंचे प्रकाश स्तंभ, आवश्यक सड़क संकेत, गति मापने वाले कैमरे और चेतावनी संकेतक लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही महामार्ग सुरक्षा क्षेत्र में भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग की पूर्व अनुमति के बिना कोई नया लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाणपत्र अथवा व्यापार अनुमति जारी नहीं करने को कहा गया।

श्रीकांत ने सभी संबंधित विभागों को इन उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक 15 दिन में जिलेवार अनुपालन रिपोर्ट विभागीय आयुक्त कार्यालय में निर्धारित समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

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