नासिक मनपा चुनाव से पहले बदला सियासी माहौल, नागरिकों के मुद्दों को लेकर उठ रही आवाज
नासिक निकाय चुनाव से पहले शहर में सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी माहौल को देखते हुए राजनीतिक दलों से अपनी सियासत को तेज कर दिया है। इसके लिए प्रदर्शन और मोर्चे भी निकाले जा रहे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
नाशिक न्यूज (सौ. डिजाइन फोटो )
Nashik News In Hindi: मनपा चुनावों की सुगबुगाहट तेज होते ही राजनीतिक दलों ने मोर्चे और आंदोलन का सिलसिला शुरू कर दिया है। शहर की खराब सड़कें, अपर्याप्त पानी की आपूर्ति और अन्य नागरिक समस्याएं अब राजनीतिक दलों के एजेंडे में सबसे ऊपर आ गई हैं।
विभिन्न राजनीतिक दल इन मुद्दों पर ध्यान खींचने के लिए प्रदर्शन और मोर्चे निकाल रहे हैं। अब प्रगतिशील दल और जन संगठनों ने भी एक बड़ा मोर्चा निकालने का आह्वान किया है। पिछले लगभग 3 साल से महानगरपालिका पर प्रशासकीय शासन था, जिस दौरान नागरिक समस्याओं की अनदेखी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
नासिक मनपा के आगामी पंचवर्षीय चुनाव के लिए प्रारूप प्रभाग संरचना की घोषणा होने के बाद, विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर सत्तारूढ़ दल और प्रशासन को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पिछले डेढ़ से दो महीनों में, मनसे, कांग्रेस, वंचित बहुजन आघाडी, आम आदमी पार्टी और शिवसेना सहित कई दलों ने महानगरपालिका के खिलाफ मोर्चा निकाला या आंदोलन किए हैं।
सम्बंधित ख़बरें
Eyeliner Tips: आई लाइनर लगाते हुए आपके भी हाथ कांपते हैं, पहली बार में लगेगा परफेक्ट, इन ट्रिक्स को करें फॉलो
Purple Foods For Daily Diet: आपकी प्लेट में क्यों होनी चाहिए बैंगनी रंग की जगह? जानें 10 सबसे पौष्टिक फूड्स
Navabharat Nishanebaaz: मंत्री पर आई नई जिम्मेदारी, बना एक और विभाग का प्रभारी
Jaya Parvati Vrat: जया पार्वती व्रत इस कथा के बिना है अधूरा, ज़रूर करें पाठ, मनोकामनाएं होंगी पूरी
ये भी पढ़ें :- शिक्षक समिति ने लगाया 39 लोगों पर आरोप, शिक्षकों के दस्तावेजों में हेराफेरी
अधूरे वादे बने मोर्चे का कारण
नागरिक समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए प्रगतिशील दल औ जन संगठनों ने 10 सितंबर को महानगरपालिका के खिलाफ एक बड़ा मोच निकालने का फैसला किया है। यह मोर्चा हुतात्मा अनंत कान्हेरे मैदान से दोपह 3:30 बजे शुरू होगा, बैठक में सड़कों की खस्ताहाली, बढ़ते ट्रैफिक जान महानगरपालिका स्कूलों की खराब स्थिति, अस्पतालों में कर्मचारियों की कर्मचारी और कचरा प्रबंधन में विफलता जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई नेताओं ने यह आरोप लगाया कि 14 हजार कर्मचारियों की आवश्यकता के बावजूद सिर्फ हजार कर्मचारियों के साथ काम चलाया जा रहा है।
