Jaya Parvati Vrat: जया पार्वती व्रत इस कथा के बिना है अधूरा, ज़रूर करें पाठ, मनोकामनाएं होंगी पूरी
Jaya Parvati Vrat 2026 : जया पार्वती व्रत में व्रत कथा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती है। जानिए क्या है व्रत कथा।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव संग मां पार्वती (सौ.AI)
Jaya Parvati Vrat Katha In Hindi : आज यानी 27 जुलाई 2026 से जया पार्वती व्रत की शुरुआत हो गई है। 5 दिनों तक चलने वाला जया पार्वती व्रत सनातन धर्म में बड़ा महत्व रखता है। इस दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की जया के रूप में पूजा की जाती है। धर्म शास्त्रों अनुसार, जया पार्वती व्रत अविवाहित कन्याएं और विवाहित महिलाएं दोनों रखती हैं।
कुंवारी लड़कियां योग्य पति के लिए यह व्रत करती हैं। वहीं शादीशुदा महिला पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत करती हैं। इसके साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी जया पार्वती व्रत रखा जाता है। तो आइए जानते हैं जया पार्वती व्रत की पावन कथा के बारे में विस्तार के यहां।
जया पार्वती व्रत कथा
वामन नामक ब्राह्मण दंपति को क्या था सबसे बड़ा दुख ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में कौडिन्य नगर में वामन नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सत्या के साथ रहता था। ब्राह्मण और उसकी पत्नी शांति से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन अपनी संतान न होने का दुख वो कभी नहीं भुला पाते थे। एक दिन नारद जी ब्राह्मण के घर आए। ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने नारद जी की खूब सेवा की और अपनी समस्या के बारे में उन्हें बताया।
सम्बंधित ख़बरें
CRPF Foundation Day: सिर्फ आंतरिक सुरक्षा नहीं, युद्ध से आपदा तक हर मोर्चे पर देश की ढाल है CRPF, जानिए इतिहास
‘जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया’ के मंगलगान से गूंजा पंडाल, जया किशोरी ने दिया धर्म और भक्ति का संदेश
Navabharat Nishanebaaz: हर कार्यकर्ता की खास चॉइस, ऊंचा पद पाने की ख्वाहिश
Lord Shiva Facts: शिवजी के रूप में छिपे हैं जीवन, मृत्यु और ब्रह्मांड के रहस्य, क्या आप जानते हैं इनका महत्व?
फिर नारद जी ने उन्हें बताया कि इस नगर के बाहर जो वन है, वहां बिल्व वृक्ष है। उस पेड़ के दक्षिण भाग के नीचे भगवान शिव माता पार्वती के साथ लिंग रूप में विराजमान हैं। यदि तुम उनकी पूजा करते हो तो तुम्हारी मनोकामना जरूर पूरी होगी।
5 वर्षों तक ब्राह्मण दंपति ने की पूजा-अर्चना
ब्राह्मण दंपति ने बिना समय गंवाए उस शिवलिंग को ढूंढा और उसकी विधि-विधान से पूजा की। लगातार 5 वर्षों तक ब्राह्मण दंपति ने उस पेड़ की पूजा की। एक दिन जब ब्राह्मण पूजा के लिए फूल तलाश रहा था तो उसे एक सांप ने काट लिया और वो वहीं पर बेहोश हो गया। ब्राह्मण की पत्नी अपने पति का घर पर इंतजार कर रही थी, लेकिन जब बहुत देर हो गई तो वो उसे खुद वन में ढूंढने के लिए चली गई।
ये भी पढ़ें- Chaturmas 2026: चतुर्मास हुआ शुरू, जानें 4 महीने क्या करें और किन नियमों से बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा
ब्राह्मण हुआ पुनः जीवित
काफी समय बाद उसे ब्राह्मण जमीन पर बेहोश पड़ा दिखाई दिया, जिसे देख वो तेज-तेज रोने लगी और वन देवता व माता पार्वती को स्मरण किया। कुछ देर बाद वहां पर वन देवता और मां पार्वती प्रकट हुई और ब्राह्मण के मुख में अमृत डालकर उसे जीवित कर दिया। इसके बाद ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने माता पार्वती की पूजा की, जिससे देवी बहुत खुश हुईं और उनसे एक वरदान मांगने को कहा। तब दोनों ने देवी के सामने संतान प्राप्ति की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद माता पार्वती ने उन्हें जया पार्वती व्रत रखने की सलाह दी।
ब्राह्मण दंपति ने सच्चे मन से की जया पार्वती व्रत की पूजा
इसके बाद ब्राह्मण दंपति ने आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन जया पार्वती का व्रत रखा, जिसके कुछ समय बाद उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। कहा जाता है कि इसी के बाद से देशभर में जया पार्वती व्रत को रखने की परंपरा शुरू हुई है।
