Nashik MHADA tender ( Source: Social Media )
Nashik MHADA Tender: नासिक सरकारी तिजोरी पर डाका डालने और मर्जी के ठेकेदारों की झोली भरने के लिए नासिक म्हाडा कार्यालय ने ‘जियो टैगिंग’ का नया ‘हथियार’ निकाला है। पाथर्डी क्षेत्र में 5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ‘लड़कियों के छात्रावास’ के टेंडर में ऐसी शर्तें थोपी गई हैं, जो सीधे तौर पर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रही हैं।
महाडा के नासिक क्षेत्रीय कार्यालय ने 23 मार्च को छात्रावास निर्माण का टेंडर जारी किया, जिसमें एक ‘विचित्र’ शर्त रखी गई है ठेकेदार को म्हाडा अधिकारी के साथ निर्माण स्थल पर जाकर जियो टैगिंग वाली फोटो खिंचवानी होगी और उसे ई-टेंडर के साथ जोड़ना होगा।
जब कोई नया या ईमानदार ठेकेदार फोटो के लिए अधिकारी को साइट पर ले जाना चाहता है, तो साहब ‘गायब’ हो जाते हैं। यदि कोई ठेकेदार खुद फोटो खींचकर दफ्तर पहुंचता है, तो बड़े अधिकारी उसे साफ लफ्जों में ‘सलाह’ देते हैं कि काम पहले ही फिक्स हो चुका है, टेंडर भरकर समय बर्बाद न करें।
शहर के बीचों-बीच दुर्गम क्षेत्र का ड्रामा हैरानी की बात यह है कि पाथर्डी जैसा इलाका मनपा की सीमा के भीतर है, जहां गूगल मैप के जरिए कोई भी आसानी से पहुंच सकता है ऐसी सुगम जगह के लिए ‘स्थल निरीक्षण’ की अनिवार्य फोटो की शर्त रखना संदिग्ध है।
यह नियम आमतौर पर अति-दुर्गम या घने जंगलों के कामों के लिए होता है। नासिक शहर के बीच ऐसी शर्त रखना केवल भ्रष्टाचार की दुर्गध फैला रहा है।
यह शर्त केवल इसलिए है ताकि नए ठेकेदार दौड़ से बाहर हो जाएं और अधिकारियों के ‘पसंदीदा’ ठेकेदारों का सिंडिकेट बिना किसी प्रतिस्पर्धा के काम डकार ले।
राज्य सरकार के उद्योग एवं ऊर्जा विभाग के स्पष्ट आदेश हैं कि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन म्हाडा में इन आदेशों की खुली अवहेलना हो रही है जब कार्यकारी अभियंता कविता निकम से इस अनोखी शर्त का कारण हुन गया, त्तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। उन्होंने बस इतना कहकर पल्ला झाड़ लिया कि पिछले 10 टेंडरों में भी ऐसा ही किया गया है।
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5 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में जियो टैगिंग के नाम पर जो बाधाएं खड़ी की गई है, वह सीधे तौर पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की हत्या है। मांग उठ रही है कि इस टेंडर प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच हो और इस विवादित शर्त को तुरंत रद्द कर निष्पक्ष निविदाएं आमंत्रित की जाए, यदि प्रशासन ने इस ‘सेटिंग’ पर लगाम नहीं लगाई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मलाई बांटने का यह खेल ऊपर से नीचे तक सेट है।