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नासिक: मैट ने पलटा पुलिस आयुक्त का फैसला, तीन बर्खास्त पुलिसकर्मी फिर सेवा में बहाल

Nashik MAT: नासिक में कैदी को निजी वाहन से होटल ले जाने के आरोप में बर्खास्त 3 पुलिसकर्मियों को महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने राहत देते हुए बर्खास्तगी रद्द कर सेवा में बहाल करने का आदेश दिया।

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: Jun 30, 2026 | 04:50 PM

नासिक, पुलिसकर्मी, मैट, बर्खास्तगी, कैदी,(सोर्स: सोशल मीडिया)

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Maharashtra Administrative Tribunal: नासिक महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (मैट) ने एक अहम फैसले में कैदी को निजी वाहन से होटल ले जाने के आरोप में बर्खास्त किए गए 3 पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी है। मैट ने पुलिस आयुक्त द्वारा जारी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए तीनों पुलिसकर्मियों को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है।

शहर पुलिस आयुक्तालय के मुख्यालय में तैनात पुलिसकर्मी पदमिंग राऊल, विक्की चव्हाण और दीपक जठार पर आरोप था कि एक गंभीर अपराध के कैदी को अदालत से जेल ले जाते समय उन्होंने सरकारी वाहन की जगह अपने निजी वाहन का उपयोग किया।

साथ ही, उन पर आरोप लगा कि वे कैदी को जेल ले जाने के बजाय एक होटल में ले गए, जहाँ उसकी मुलाकात उसके रिश्तेदारों से कराई गई। इस मामले के सामने आते ही तत्कालीन पुलिस आयुक्त ने बिना किसी विभागीय जांच के तीनों को सीधे बर्खास्त कर दिया था।

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मैट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां…

मैट के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मंगेश पाटिल और प्रशासनिक सदस्य देवाशीष चक्रवर्ती की पीठ ने इस एकतरफा कार्रवाई को अवैध ठहराया। न्यायाधिकरण ने अपनी टिप्पणी में कहा कि किसी भी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करने से पूर्व विभागीय जांच करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, कर्मचारी को जांच के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

सबूतों के बावजूद विभागीय जांच नहीं, तीन पुलिसकर्मियों की सेवा बहाल

जब सहायक आयुक्त के पास प्राथमिक जांच में होटल प्रबंधक का बयान, बिल और सीसीटीवी फुटेज जैसे पुख्ता सबूत थे, तो फिर नियमित विभागीय जांच क्यों नहीं कराई गई? तीनों पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से सेवा में बहाल करने का आदेश दिया गया है।

यह भी पढ़ें:-नासिक में तोड़फोड़ करने वालों पर पुलिस का शिकंजा, 6 आरोपी गिरफ्तार, घटनास्थल पर कराया पुनर्गठन

अवधिः बर्खास्तगी की अवधि का वेतन तो नहीं मिलेगा, लेकिन इस समय को सेवा में रुकावट न मानकर ‘कर्तव्य काल’ के रूप में गिना जाएगा। हालांकि उन्हें बहाल कर दिया गया है, लेकिन पुलिस आयुक्तालय अब नए सिरे से उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर सकता है। पुलिसकर्मियों की ओर से अधिवक्ता बी. ए. बांदिवडेकर ने न्यायाधिकरण में मजबूती से पक्ष रखा।

Nashik mat reinstates three policemen dismissed in prisoner hotel case

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Published On: Jun 30, 2026 | 04:50 PM

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