घरेलू उद्योग से लाख की कमाई, नासिक बना ‘लखपति दीदी’ में नंबर वन जिला; 2.5 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर
Nashik Lakhpati Didi: नासिक में SHG से जुड़ी 2.5 लाख महिलाओं की सालाना आय 1 लाख तक पहुंची। जिले ने ‘लखपति दीदी’ पहल में टॉप रैंक हासिल की।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik District Women Empowerment: नासिक जिले के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को इनकम देने वाले सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी 2.5 लाख महिलाओं की सालाना इनकम एक लाख तक पहुंच गई है। इनकी वजह से नासिक जिला ‘लखपति दीदी’ पहल में टॉप पर पहुंच गया है।
‘लखपति दीदी’ पहल को डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी ऑफिस ने काबिल महिलाओं को फाइनेंशियली काबिल बनाने के लिए लागू किया है। ये महिलाएं घरेलू उद्योग, सिलाई मशीन, बकरी पालन, मसाला उद्योग, पापड़ उद्योग करती हैं। लखपति दीदी पहल के तहत नासिक जिले को दी लाख 58 हजार का टारगेट दिया गया था। इनमें से 2.5 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
महिलाओं की आय में हो रही वृद्धि
यह पहल येवला के पाटिलकी ग्रांउ, निफाड़ के गोल्डन ड्रॉप, पेठ-त्र्यंबकेश्वर के ईट बाइजली और सिन्नर के हैडीक्राफ्ट वंडर्स ब्रांड जैसे कई ब्रांड के जरिए की जा रही है। अभी जिले में 26,150 सेल्फ हेल्प ग्रुप, 1,338 विलेज एसोसिएशन बनाए गए हैं, और ऑर्गनाइजेशन के हिसाब से 71 वार्ड एसोसिएशन बनाए गए हैं।
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प्यारी बहनों को सिर्फ 1,500 पर डिपेंडेंट न रहना पड़े, उन्हें महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए उनके बिजनेस के लिए फाइनेंशियल मदद देकर मजबूत बनाया जाएगा।
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सरकार हर गाव में प्यारी बहनों के लिए एक क्रेडिट सोसाइटी शुरू करके और जिला बैंक के जरिए उन्हें 1 लाख का बिना ब्याज का लौन देकर उनके साथ खड़ी रहेगी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर अपना संकल्प जताया कि इस तरह राज्य की एक करोड़ प्यारी बहनों को करोडपति बनाया जाएगा, जिले में महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए अलग-अलग सामान बनाने का काम चल रहा है।
इसमें हैडीक्राफ्ट, पैठनी आइटम, वारली और स्क्रीन प्रिंटिंग, अचार, पापड़, ज्वेलरी, मसाले, नागली से बने अलग-अलग प्रोडक्ट, बांस के प्रोडक्ट, खाने-पीने की चीजें वगैरह शामिल हैं।
