नासिक गर्मी, लू का असर( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Temperature Rise: नासिक पिछले सप्ताह शहर और ग्रामीण इलाकों में हुई बेमौसमी बारिश के बाद तापमान में आई गिरावट अब फिर से बढ़त में तब्दील हो गई है। रविवार के दिन पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
भीषण गर्मी और लू का सबसे ज्यादा असर रविवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार पर पड़ा, जहां चिलचिलाती धूप के कारण खरीदारों की संख्या न के बराबर रही। साप्ताहिक बाजार को शहरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
रविवार के बाजार में नांदगांव, चांदवड़, येवला, मालेगांव, चालीसगांव, कोपरगांव, सटाणा और लासलगांव जैसे तहसीलों से सैकड़ों किसान और व्यापारी सब्जियां, फल, मसाले, कपड़े, अनाज और अन्य जीवन रक्षक वस्तुएं बेचने आते हैं।
सामान्य दिनों में यहां लाखों रुपये का कारोबार होता है, लेकिन रविवार को गर्मी के कारण बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। इसके चलते दुकानदारों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।
एक ओर जहां सूरज आग उगल रहा है, वहीं दूसरी ओर घंटों हो रही बिजली कटौती ने नागरिकों की परेशानी दोगुनी कर दी है। गर्मी का सबसे भीषण प्रहार झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब तबके पर पड़ रहा है। घरों के भीतर उमस बैठने नहीं दे रही और बाहर की चिलचिलाती धूप निकलने नहीं दे रही, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है।
इस वर्ष मार्च की शुरुआत से ही गर्मी के कडे तेवर दिखने लगे थे, लेकिन अप्रैल की शुरुआत में हुई बेमौसमी बारिश से पारा लुढ़क कर 34 से 35 डिग्री तक आ गया था और सुबह के समय हल्की ठंड महसूस की जा रही थी।
यह भी पड़ें:-आंदोलन के बाद मिली सफलता, नासिक में पानी संकट से राहत, टैंकरों को मिला नया सहारा
लेकिन अब मौसम ने फिर करवट ली है और तापमान 40 से 42 डिग्री के बीच पहुंच गया है। सडको पर दोपहर के समय सन्नाटा छाया रहता है क्योंकि लोग लू के डर से घरों में ही कैद रहने को मजबूर हैं। शहर की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने वाले इस साप्ताहिक बाजार पर प्रकृति की इस मार ने स्थानीय व्यापार को काफी हद तक प्रभावित किया है।