भंडारा में OBC जातिवार जनगणना की मांग को लेकर अनशन 20वें दिन भी जारी, सांसद प्रशांत पडोले का मिला समर्थन
Bhandara OBC protest: भंडारा में ओबीसी की जातिवार जनगणना और अलग कॉलम की मांग को लेकर जारी अनशन 20वें दिन पहुंचा। सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने आंदोलन को संसद में उठाने का आश्वासन दिया।
- Written By: रूपम सिंह
ओबीसी जातिवार जनगणना (सोर्स-सोशल मीडिया)
Bhandara OBC Caste Based Census Protest: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातिवार जनगणना कराने तथा राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर भंडारा जिला कलेक्ट्रेट परिसर के सामने जारी अनिश्चितकालीन श्रृंखलाबद्ध अनशन सोमवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन को लगातार बढ़ता जनसमर्थन मिल रहा है और बड़ी संख्या में ओबीसी समाज के लोग आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं।
आंदोलन को समर्थन देने के लिए भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. प्रशांत पडोले भी अनशन स्थल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज की जायज मांगों और उनकी आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आंदोलनकारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जातिवार जनगणना और ओबीसी के अधिकारों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे को संसद में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे उमेश मोहतुरे ने कहा कि ओबीसी समाज लंबे समय से अपने सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक अधिकारों की सुनिश्चितता के लिए जातिवार जनगणना की मांग कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न सरकारों ने समय-समय पर केवल आश्वासन दिए, लेकिन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। उनका कहना था कि ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों के पास जन्म, मृत्यु, परिवार और जातिवार आंकड़े पहले से उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर प्रभावी जनगणना की जा सकती है।
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आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनकी प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम का प्रावधान, ओबीसी की जातिवार जनगणना तथा जनसंख्या के अनुपात में संवैधानिक अधिकारों, प्रतिनिधित्व और सुविधाओं की गारंटी शामिल है।
ओबीसी संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक सदानंद इलमे के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में बालकृष्ण सार्वे, भगीरथ धोटे, रोशन उरकुडे, प्रभाकर वैरागड़े, ज्ञानचंद जांभूलकर, गोपाल सेलोकर, किशन शेंडे, पांडुरंग खाटिक, सुभद्रा झंझाड, गुणवंत पंचबुधे और उमेश मोहतुरे सहित अनेक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने आने से नीतिगत निर्णयों और आरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं न्यायसंगत बनाया जा सकेगा।
