महावितरण बनाम आयोग: बिजली दरों पर घमासान, नासिक में बिलिंग को लेकर बढ़ा विवाद; उपभोक्ता परेशान
Nashik Electricity Tariff Dispute: नासिक में बिजली दरों को लेकर महावितरण व विद्युत नियामक आयोग के बीच विवाद गहरा गया है। HC के आदेश के बावजूद बढ़ी हुई दरों से बिलिंग होने से उपभोक्ताओं में भ्रम है।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik MSEDCL Billing Issue( Source: Social Media )
Nashik MSEDCL Billing Issue: नासिक राज्य में घरेलू बिजली दरों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। महावितरण द्वारा बिजली दरों में कटौती का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में आम ग्राहकों के बीच भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग और महावितरण के बीच चल रही खींचतान का खामियाजा अब उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। विवाद का मुख्य कारण बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया है।
महावितरण जून 2025 के विवादित आदेशों के आधार पर बिलिंग की बात कर रहा है, जबकि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मार्च 2025 वाली स्थिति ही बरकरार रखी जाए।
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उच्च न्यायालय द्वारा जून 2025 के बढ़े हुए दरों वाले निर्णय को रद्द करने के बावजूद, महावितरण उसी बढ़े हुए दर से बिल वसूल रहा है, जिससे कानूनी और प्रशासनिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
स्मार्ट मीटर वाले ग्राहकों के लिए दिन भर के बिजली उपयोग पर रियायत देने की योजना है। सुबह 9 से शाम 5 बजे के बीच बिजली का उपयोग करने वालों के लिए दरों में छूट का प्रावधान किया गया है।
ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ
अप्रैल 2026 से ग्राहकों को वास्तव में किस दर से बिल मिलेगा, इसे लेकर अभी भी लाखों उपभोक्ता संशय में है। महावितरण नासिक मंडल के मुख्य अभियंता सुंदर लपटे ने दावा है कि बिजली दरों में कटौती का निर्णय दीर्घकालिक स्थिरता और लागत को ध्यान में रखकर लिया गया है।
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पीक आवर्स के दौरान घटक कम हो रहे हैं, जिससे मध्यम श्रेणी के उपभोक्ताओं को लाभहोगा। बिजली उपभोक्ता प्रतिनिधि सिद्ध सोनी ने कहा, महावितरण पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान दर संरचना ग्राहक हितैषी नहीं है। पीक आवर्स प्रीमियम को कम न करना और सौर घंटो की अपर्याप्त रियायत ग्राहको पर अतिरिक्त बाड़ा डाल रही है।
