प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Heavy Vehicles, Road Accident: नासिक द्वारका चौक में चल रहे ‘ग्रेड सेपरेटर’ के निर्माण कार्य के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए लगाए गए ‘हेवी गर्डर’ (लोहे की कमान) अब वाहन चालकों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
स्पष्ट निर्देशों, वैकल्पिक मार्गों के प्रभावी नियोजन और सख्त कार्यान्वयन की कमी के कारण पिछले चार दिनों में इन कमानी से टकराकर दो दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसने शहर की यातायात व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।
ग्रेड सेपरेटर के काम की वजह से सारडा सर्कल, ट्रैक्टर हाउस और आसपास के इलाकों में जाम न लगे, इसके लिए ठेकेदार ने निश्चित ऊंचाई के लोहे के गर्डर लगाए हैं। इनका उद्देश्य कंटेनर, बसों और ट्रकों जैसे भारी वाहनों को इस मार्ग से प्रतिबंधित करना है।
हालांकि, कुछ लापरवाह वाहन चालक इन गर्डरों के नीचे से निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। पिछले 4 दिनों में 2 बार तेज रफ्तार कंटेनरों ने इन कमानी को टक्कर मारी।
बुधवार 4 फरवरी को भी सारडा सर्कल क्षेत्र में एक भारी वाहन के टकराने से गर्डर क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे दोपहर बाद दोबारा ठीक किया गया। स्थानीय लोगों का निरीक्षण है कि इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को आगे गर्डर होने का पता नहीं चलता।
दिशा-सूचक बोर्ड, ऊंचाई की स्पष्ट जानकारी, और रात के समय रिफ्लेक्टर या पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण ये हादसे हो रहे हैं।
आडगांव नाका, ट्रैक्टर हाउस, डीजीपी नगर और अशोका मार्ग जैसे स्थानों पर भारी वाहनों को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता है।
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द्वारका क्षेत्र के काटे गली सिग्नल तक खुदाई का काम चलने के कारण बड़े वाहनों को दूसरे रास्तों पर मोड दिया गया है। यातायात प्रबंधन के लिए पुलिस और ट्रैफिक वार्डन तैनात किए गए है तथा मुख्य मार्गों पर लोहे की जालियां (बेरिके) लगाई गई है। इसके बाठजूद संकरी सड़को पर रिक्शा चालकों और फेरीवालों के अतिक्रमण के कारण जाम की स्थिति विकराल होती जा रही है।