नांदगांव खंडेश्वर तहसील की 51 ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधि नहीं, प्रशासकों के भरोसे चल रहा गांवों का कामकाज

Amravati Gram Panchayat Election: नांदगांव खंडेश्वर तहसील की 51 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से कारभार प्रशासकों के हाथों में है। ग्रामीण अब जल्द ग्राम पंचायत चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
nandgaon khandeshwar 51 gram panchayats without representatives administrator rule
प्रशासक राज ग्राम पंचायतएआय जनरेटेड फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Gram Panchayat Administrator Amravati: नांदगांव खंडेश्वर तहसील की 68 ग्राम पंचायतों में से 51 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इसके चलते इन ग्राम पंचायतों का प्रशासन फिलहाल प्रशासकों के माध्यम से चलाया जा रहा है। निर्वाचित सरपंच, उपसरपंच और ग्राम पंचायत सदस्यों के नहीं होने से गांवों के विकास कार्यों की योजना और स्थानीय समस्याओं को प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

स्थानीय समस्याएं बढ़ीं

ग्राम पंचायतों में प्रशासकीय व्यवस्था होने से ग्रामीणों को सड़क, नाली, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं रखने के लिए जनप्रतिनिधित्व वाली व्यवस्था शुरू होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

बारिश के मौसम में कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर कीचड़, नालियों के जाम होने और मच्छरों के प्रकोप जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल निर्णय लेकर उपाययोजना करना जरूरी होता है, लेकिन प्रशासकीय व्यवस्था में विकास कार्यों से जुड़े निर्णयों की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है।

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विकास कार्यों पर असर

गांवों में विकास कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया, निधि वितरण और प्रशासनिक मंजूरी महत्वपूर्ण होती है। निर्वाचित ग्राम पंचायत नहीं होने से विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करते समय ग्रामीणों की अपेक्षाओं को अपेक्षित स्थान नहीं मिल रहा है, ऐसी भावना ग्रामीणों ने व्यक्त की है। कुछ स्थानों पर विकास कार्य अधूरे या लंबित होने से समस्याएं कायम हैं।

चुनाव की घोषणा का इंतजार

ग्राम पंचायत ग्रामीण क्षेत्रों की स्थानीय स्वराज्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। राज्य सरकार ने प्रशासकों की नियुक्ति छह महीने के लिए की थी। यह अवधि बीतने के बावजूद ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ग्रामीण अब चुनाव की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। चुनाव जल्द कराकर स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं का नियमित कामकाज शुरू करने की मांग जोर पकड़ रही है।

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