नासिक में NAFED और NCCF की सख्ती, प्याज उत्पादकों में नाराजगी, कलेक्टर के निर्देश बेअसर
Nashik Onion Procurement Controversy: सरकारी प्याज खरीद के दौरान NAFED और NCCF की कड़ी शर्तों से किसान परेशान हैं। यूआरएस प्याज नहीं खरीदा जा रहा, जबकि कलेक्टर के निर्देशों की भी अनदेखी हो रही है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
प्याज उत्पादक (सोर्स: सोशल मीडिया)
NAFED-NCCF Onion Purchase Conditions Under Fire In Nashik: प्याज के बाजार भाव में आई भारी गिरावट के बाद केंद्र सरकार ने 1580 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सीधे कृषि उपज मंडी समितियों से प्याज खरीदने की शुरुआत की है लेकिन इस सरकारी खरीद में लगाई गईं सख्त शर्तें और नियम किसानों के लिए बड़ा रोभ और अड़चन साबित हो रहे हैं।
मूल्य स्थिरीकरण योजना के तहत NAFED और NCCF ने सोमवार 1 जून से जिले की मंडियों में सीधे प्याज की खरीद शुरू की है लेकिन चयनित 36 संस्थाओं में से मात्र गिनी-चुनी संस्थाओं ने ही प्रत्यक्ष खरीद शुरू की है। इसमें भी किसानों को बेहद जटिल शर्तों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे प्याज खरीद की यह प्रक्रिया पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
कड़े मानकों से किसान बेहाल
सरकारी मानकों के अनुसार प्याज उच्च गुणवत्ता और साफ होना चाहिए। दागदार, अंकुरित, काले धब्बे लगा या नरम प्याज स्वीकार नहीं किया जा रहा है। चाल (भंडारण गृह) में रखा पुराना प्याज इन मानदंडों में फिट नहीं बैठ रहा है, जिससे किसानों को अपना माल वापस ले जाना पड़ रहा है।
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इसके अलावा, बिक्री के लिए पंजीकृत किसान होना अनिवार्य है और साथ ही सातबारा उतारा, पहचान पत्र और बैंक पासबुक की प्रतियां मांगी जा रही हैं। नियमों के तहत 60% ए ग्रेड और 40% URS प्याज खरीदने का सूत्र तय होने के बावजूद दोनों एजेंसियां URS प्याज को वापस लौटा रही हैं।
प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना
शनिवार 6 जून को कलेक्ट्रेट में हुई मंत्रियों और प्रशासन की बैठक में जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने संबंधित संस्थाओं को URS प्याज खरीदने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद NAFED और NCCF द्वारा इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे इस सरकारी खरीद की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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कृषि विशेषज्ञ सचिन होलकर ने क्या कहा
NAFED और NCCF ने नीलामी में उतरने की कोई पूर्व तैयारी नहीं की है। खुले बाजार में उच्च श्रेणी के प्याज के दाम अधिक होने के कारण सरकारी एजेंसियां उस दर पर खरीद नहीं पा रही हैं। निफाड के एक किसान का प्याज खरीदने के बाद उसमें खामियां निकालकर अड़ंगा लगाया गया। इनके पास कोई सुदृढ़ तंत्र नहीं है, यह केवल समय काटने और किसानों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है।
