मालेगांव मनपा चुनाव: नामांकन वापसी के बाद तस्वीर साफ, 84 सीटों के लिए 307 उम्मीदवार मैदान में
Malegaon Politicsमालेगांव मनपा चुनाव में नामांकन वापसी के बाद स्थिति साफ हो गई है। 84 सीटों के लिए अब 307 उम्मीदवार मैदान में हैं, 219 उम्मीदवार रेस से बाहर हो चुके हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Malegaon Municipal Election: मालेगांव राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मालेगांव महानगरपालिका चुनाव की घोषणा के बाद अब चुनावी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है।
नामांकन वापसी के अंतिम दिन शुक्रवार तक चले भारी सियासी ड्रामे के बाद अब यह साफ हो गया है कि शहर की सत्ता की चाबी किसके पास होगी। कुल 84 सीटों के लिए अब 307 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे।
इस बार मालेगांव में उम्मीदवारों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा गया, जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं। पहली बार मनपा चुनाव के लिए रिकॉर्ड 814 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था।
सम्बंधित ख़बरें
शरद पवार गुट को तगड़ा झटका: पूर्व मंत्री प्राजक्त तनपुरे थामेंगे भाजपा का दामन; सोशल मीडिया पर दिए बड़े संकेत
शाह फॉर्मूले में शिंदे को शह: विधान परिषद चुनाव में 11 सीटों के साथ BJP बनी बड़ा भाई, शिंदे और पवार बैकफुट पर
तीसरी मुंबई में कहां से आएगा पानी ? उरण के 25,000 परिवारों के सामने जल संकट, फंड की कमी से जलजीवन स्कीम लटकी
मेडल नहीं जीता, दो लोगों की जान ली है;Pune Porsche Case के आरोपी के वायरल वीडियो पर भड़के पीड़िता के पिता
कागजातों की बारीकी से जांच के बाद 526 आवेदन वैध पाए गए थे। नाम वापसी के पहले दिन 42 और दूसरे दिन 177 उम्मीदवारों ने अपने पर्चे वापस लिए। इस तरह कुल 219 इच्छुक चुनावी रेस से बाहर हो गए हैं।
मालेगांव मनपा का चुनावी ढांचा
शहर को दो मुख्य हिस्सों में बांटकर चुनाव लड़ा जा रहा है। मालेगांव मनपा के कुल 21 प्रभागों से 84 नगरसेवकों का चुनाव होना है। चुनाव के लिए शहर को ‘पूर्व’ और ‘पश्चिम’ भागों में बांटा गया है।
मत विभाजन का खतरा और पार्टियों की रणनीति
अंतिम समय में हुई नाम वापसी से कई प्रमुख राजनीतिक दलों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि उनके बागी उम्मीदवार मान-मनौव्वल के बाद पीछे हट गए हैं।
यह भी पढ़ें:-नामांकन वापसी के आखिरी दिन नासिक में हाई-वोल्टेज ड्रामा, कुछ मिनटों की देरी और पलट गई सियासी किस्मत
हालांकि, कई प्रभागों में अभी भी निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं, जिससे मुख्य दलों के वोटों में सेंध लगने (मत विभाजन) की आशंका बढ़ गई है। लंबे अंतराल के बाद हो रहे इन चुनावों को लेकर जनता में भी भारी उत्साह है।
