चंद्रपुर में धान की फसल सूखने पर भाकपा का फूटा गुस्सा, गोसीखुर्द दायां नहर विभाग कार्यालय का किया घेराव
Chandrapur Farmers News: ब्रह्मपुरी में बारिश थमने से धान की फसलें सूखने लगी हैं। पानी और बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर भाकपा नेता विनोद झोडगे के नेतृत्व में किसानों ने गोसीखुर्द नहर कार्यालय घेरा।
- Written By: केतकी मोडक
गोसीखुर्द नहर (फाईल फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Chandrapur Farmers Protest At Gosikhurd Canal: खरीफ सीजन की शुरुआत में अच्छी बारिश होने के बाद पिछले कई दिनों से वर्षा पूरी तरह थम गई है। तेज धूप और सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी के कारण चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में धान की फसल और पौध सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। पानी के अभाव में धान की रोपाई भी पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे किसानों के सामने पूरे वर्ष की खेती चौपट होने का खतरा मंडरा रहा है।
किसानों की इसी गंभीर समस्या को लेकर शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के जिला सहसचिव कॉमरेड विनोद झोडगे पाटिल के नेतृत्व में सायगाटा कॉलोनी स्थित गोसीखुर्द दायां नहर विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया गया।
आंदोलन को संबोधित करते हुए कॉमरेड विनोद झोडगे पाटिल ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 से गोसीखुर्द परियोजना के लिए किसानों की भूमि बेहद कम कीमत पर अधिग्रहित की गई थी। पिछले कुछ वर्षों से बढ़े हुए मुआवजे का आश्वासन देकर किसानों से विभिन्न दस्तावेज जमा कराए गए, जिन पर प्रत्येक किसान का 20 से 30 हजार रुपये तक का खर्च हुआ।
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2 से 3 दिनों के भीतर पानी छोड़ने का अल्टीमेटम
इसके बावजूद 6 से 7 महीने बीत जाने के बाद भी किसानों को 1 रुपये का भी अतिरिक्त मुआवजा नहीं मिला, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि गोसीखुर्द बांध में पर्याप्त जल भंडारण उपलब्ध होने के कारण आगामी 2 से 3 दिनों के भीतर नहरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए तत्काल पानी छोड़ा जाए। साथ ही, परियोजना प्रभावित किसानों को बढ़े हुए मुआवजे की राशि बिना किसी देरी के प्रदान की जाए।
आंदोलन में ब्रह्मपुरी तहसील, नागभीड़, सिंदेवाही, गांगलवाड़ी, हलदा, मुडझा सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों किसान शामिल हुए। इस दौरान ‘गोसीखुर्द का पानी मिलना ही चाहिए’, ‘पानी हमारा अधिकार है’, ‘जय जवान-जय किसान’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
आंदोलन के दौरान किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने कार्यकारी अभियंता शेख से मुलाकात कर अपनी मांगों को विस्तार से रखा। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समय पर सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया और फसलों को नुकसान हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
8 दिनों के भीतर पानी छोड़ने का आश्वासन
कार्यकारी अभियंता ने किसानों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए 8 दिनों के भीतर नहर में पानी छोड़ने का आश्वासन दिया। साथ ही, बढ़े हुए मुआवजे के मुद्दे पर नागपुर में किसानों के प्रतिनिधियों के साथ शीघ्र बैठक आयोजित करने की सहमति भी जताई।
आंदोलन संबंधी ज्ञापन की प्रतिलिपियां राज्य के सिंचाई मंत्री, विदर्भ सिंचाई विकास महामंडल के संचालक, गोसीखुर्द परियोजना मंडल के मुख्य एवं अधीक्षण अभियंता, ब्रह्मपुरी तहसीलदार तथा पुलिस निरीक्षक को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
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इस अवसर पर नीलेश बनकर, संदीप बगमारे, चुन्नीलाल मोटघरे, लोमेश मेश्राम, प्रमोद सातपुते, ओमप्रकाश सोनटक्के, नामदेव बोरघरे, नरेश चंद्र राऊत, शंकर राऊत, अनिल तोंडफोडे, अमोल दामले, दीपक राऊत, शामराव मेश्राम, पुरुषोत्तम पानसे, दिलीप कनाके, शिवराम दोनाडकर, धनंजय नाकतोडे, नंदू ढोरे, मयूर दुर्गे, लोमेश पाल, प्रकाश राऊत सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
