Nashik District Administration Action ( Source: Social Media )
Nashik District Administration Action: मालेगांव तहसील के मौजे टोकडे में स्थित पाझर तालाब (परकोलेशन टैंक) के डूब क्षेत्र में हुए अवैध गौण खनिज उत्खनन मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संबंधित जिला परिषद सदस्य की संपत्ति (सातबारा उतारा) पर 30 लाख 72 हजार रुपये के दंड का बोझ दर्ज किया गया है।
हालांकि, शिकायतकर्ता ने इस कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए दोबारा गुहार लगाई है, जिसके बाद अब मामले की नए सिरे से तकनीकी जांच शुरू हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता विठोबा द्यानद्यान की शिकायत के अनुसार, गट क्रमांक 285 और 304 के अंतर्गत आने वाले तालाब के डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया गया है।
तालाब क्षेत्र से पत्थर, मिट्टी और मुरूम का अवैध रूप से उत्खनन किया गया। इस खुदाई से प्राप्त सामग्री का उपयोग साढ़े तीन हेक्टेयर क्षेत्र में 2.5 से 3 फीट ऊंचा भराव कर सरकारी जमीन को निजी खेती योग्य बनाने में किया गया।
मालेगांव तहसीलदार ने जांच में लगभग 300 ब्रास पत्थर के अवैध उत्खनन पर 30.72 लाख रुपये का जुर्माना तय किया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रशासन ने गट क्रमांक 285 के 1.01 हेक्टेयर क्षेत्र पर इस दंड की राशि का बोझ चढ़ा दिया है।
यह तालाब केंद्र सरकार की ‘अमृत सरोवर’ योजना (सरोवर आईडी 98239) के अंतर्गत आता है। अवैध भराव के कारण गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, भराव के कारण तालाब की पानी रोकने की क्षमता कम हो गई है, जिससे भूजल स्तर पर बुरा असर पड़ सकता है।
जल संग्रहण क्षेत्र कम होने से भविषय में आस-पास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पिछले 3 वर्षों से तालाब की मरम्मत और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में रुकावट पैदा की जा रही है।
शिकायतकर्ता विठोबा द्यानद्यान ने जिलाधिकारी से मिलकर आपति जताई कि दंड केवल ‘पत्थर पर लगाया गया है, जबकि मिट्टी और मुरूम का हिसाब नहीं जोड़ा गया।
इसके बाद नासिक जिला खनिकर्म अधिकारी ने 25 मार्च 2026 को कड़े निर्देश जारी किए हैं- अब ईटीएस (इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन) पद्धति के माध्यम से कुल 3.28 हेक्टेयर क्षेत्र में हुए भराव की सटीक पैमाइश की जाएगी।
प्रशासन अब अर्थ और इसरी भुवन की सैटेलाइट इमेजरी के जरिए उत्खनन की अवधि और मात्रा की पुष्टि करेगा। नई जांच के बाद दंड की राशि बढ़ने और फौजदारी मामला दर्ज होने की प्रबल संभावना है।
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संबंधित सदस्य ने अवैध उत्खनन कर साढ़े तीन हेक्टेयर जमीन तैयार की है। है। अधिकारी जब भी पैमाइश के लिए आए, उन्हें डराकर वापस भेज दिया गया। अभी लगा जुर्माना केवल पत्थरों पर है। इसलिए मैंने जिलाधिकारी से दोबारा जांच की मांग की है।
– सामाजिक कार्यकर्ता, विठोबा द्यानद्यान