छत्रपति संभाजीनगर में जलसंकट का तपिश, 45 डिग्री के करीब पहुंचा पारा, अब 85 टैंकरों के भरोसे शहर की प्यास
Sambhajinagar Water Crisis: छत्रपति संभाजीनगर में भीषण गर्मी के कारण जलसंकट गहराया। मनपा ने टैंकरों की संख्या बढ़ाकर 85 की। 'नो नेटवर्क' क्षेत्रों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी।
- Written By: गोरक्ष पोफली
प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar Water Crisis 2026: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। छत्रपति संभाजीनगर में सूरज की तपिश के साथ-साथ अब जलसंकट (Water Crisis) भी गहराने लगा है। शहर के कई इलाकों में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि हजारों नागरिकों को एक-एक बूंद पानी के लिए टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है। बढ़ती मांग को देखते हुए महानगरपालिका प्रशासन ने टैंकरों की संख्या बढ़ाकर 85 कर दी है।
क्यों बढ़ाना पड़ा टैंकरों का बेड़ा?
कुछ सप्ताह पहले तक शहर में जलापूर्ति के लिए 79 टैंकर तैनात थे। हालांकि, मई महीने में तापमान में हुई बेतहाशा वृद्धि और भूजल स्तर (Groundwater Level) के तेजी से नीचे जाने के कारण बोरवेल सूखने लगे हैं। नतीजतन, उन इलाकों में भी पानी की किल्लत हो गई है जहाँ पहले निजी बोरवेल से काम चल जाता था। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 6 अतिरिक्त टैंकर बेड़े में शामिल किए हैं।
नो नेटवर्क क्षेत्रों में सबसे बुरा हाल
शहर के गुंठेवारी और वे इलाके जहाँ अभी तक स्थायी जलवाहिनी (Pipeline) का नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है, वहां स्थिति सबसे चिंताजनक है।
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- फेरों की संख्या: वर्तमान में ये 85 टैंकर प्रतिदिन 300 से 325 फेरे लगा रहे हैं।
- निर्भरता: हजारों परिवार अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह से इन सरकारी टैंकरों पर निर्भर हैं।
- चुनौती: भारी संख्या में फेरों के बावजूद कई मोहल्लों से अभी भी पानी की कमी की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
बोरवेल हुए फेल, नागरिकों की बढ़ी मुसीबत
शहर के लगभग हर हिस्से से बोरवेल सूखने की खबरें आ रही हैं। इससे न केवल आम नागरिक बल्कि व्यावसायिक संस्थान भी परेशान हैं। गर्मी के कारण जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि प्रशासन के लिए नियमित जलापूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। घंटों इंतजार के बाद आने वाले टैंकरों के पास महिलाओं और बुजुर्गों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं।
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अस्थायी राहत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
बढ़ती दिक्कतों के बीच नागरिकों ने प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है कि टैंकर केवल एक अस्थायी विकल्प है। शहर के लिए नई जलवाहिनी योजना को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। स्थायी जल प्रबंधन और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को कड़ाई से लागू किया जाए। टैंकर वितरण में पारदर्शिता हो ताकि हर इलाके को समान रूप से पानी मिल सके।
