
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Union Budget 2026: नासिक त्र्यंबकेश्वर केंद्रीय बजट 2026 ने नासिक और उत्तर महाराष्ट्र के विकास के सपनों को बड़ा झटका दिया है। आगामी 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले से ठीक एक साल पहले पेश किए गए इस बजट में नासिक के लिए किसी विशेष प्रावधान का उल्लेख तक नहीं किया गया। इस ‘चुप्पी’ ने न केवल स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को निराश किया है, बल्कि त्र्यंबकेश्वर के साधु-संतों में भी सरकार के प्रति तीव्र आक्रोश पैदा कर दिया है।
त्र्यंबकेश्वर को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की दशकों पुरानी मांग को इस बजट में भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। रेल सुविधा न होने से लाखों श्रद्धालुओं का भार केवल सड़क मार्ग पर रहेगा, जिससे कुंभ के दौरान यातायात प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। साधु-महंतों का कहना है कि एक तरफ सरकार तीर्थस्थलों के विकास का दावा करती है, वहीं महाराष्ट्र के इस सबसे बड़े धार्मिक समागम के लिए बजट में ‘शून्य’ प्रावधान करना समझ से परे है।
रेलवे और बुनियादी ढांचे के मामले में नासिक को एक बार फिर हाशिए पर धकेल दिया गया है। नासिक-पुणे हाई-स्पीड रेलवे का काम वर्षों से लंबित है, लेकिन बजट में मुंबई-पुणे हाई-स्पीड कॉरिडोर को प्राथमिकता दी गई।
इसके अलावा निओ मेट्रो, एग्री टर्मिनल, रेलवे ट्रैक्शन कारखाना और रेलनीर जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर केंद्र ने चुप्पी साध रखी है। जानकारों का मानना है कि मुंबई, पुणे और नागपुर के मुकाबले नासिक के जनप्रतिनिधियों की बताया कमजोर इच्छाशक्ति शहर के विकास पर भारी पड़ रही है।
प्रशासन ने सिंहस्थ कुंभ के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का मास्टर प्लान तैयार किया था। इसमें रिंग रोड के लिए 3.5 हजार करोड़ की उम्मीद केंद्र से थी।
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विडंबना यह है कि प्रयागराज की तर्ज पर ‘धार्मिक कॉरिडोर’ तो दूर, बजट भाषण में इस वैश्विक आयोजन का साधारण जिक्र तक नहीं हुआ। केंद्र से सहायता न मिलने के कारण अब सारा वित्तीय बोझ राज्य सरकार और स्थानीय निकाय पर आ गया है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर है।
प्रमुख उपेक्षित परियोजनाएंः एक नजर में






