भूमि अभिलेख कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल से कामकाज ठप, मालेगांव में भी भारी प्रदर्शन
Malegaon Protest News: महाराष्ट्र में भूमि अभिलेख कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल से मालेगांव सहित कई जिलों में कामकाज ठप हो गया है और किसानों व नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Malegaon Protest (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Land Record Employees Strike: अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर महाराष्ट्र राज्य के भूमि अभिलेख कर्मचारियों ने पिछले सोमवार से राज्यव्यापी हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। इस आंदोलन के समर्थन में मालेगांव स्थित भूमि अभिलेख कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं, जिससे कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।
सोमवार, 2 मार्च से जारी इस कामबंद आंदोलन के कारण सरकारी फाइलों की आवाजाही रुक गई है और कर्मचारियों ने कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। राज्य में यह विरोध प्रदर्शन 18 फरवरी से असहयोग आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था। शुरुआत में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया, फिर 20 फरवरी से जमीन की पैमाइश का काम बंद कर दिया। इसके बाद 23 से 26 फरवरी तक सामूहिक अवकाश लिया गया और 27 फरवरी को पुणे स्थित जमाबंदी आयुक्त कार्यालय पर ‘आक्रोश मोर्चा’ निकाला गया।
तकनीकी वेतन श्रेणी और निजीकरण के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन
शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय न होने के कारण अब 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई है। इस आंदोलन में राज्य तकनीकी एवं कास्ट ट्राइब संगठन के हेमंत साली, प्रकाश अहिरे और जिला अध्यक्ष प्रशांत बोंडे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सदस्य सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
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प्रमुख मांगें
- आंदोलनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- तकनीकी वेतन श्रेणी लागू करना
- विभाग के निजीकरण के निर्णय को तत्काल रद्द करना
- संशोधित आकृतिबंध लागू करना
- निश्चित यात्रा भत्ते को वेतन में शामिल करना
- खेत-रास्ता पैमाइश और सीमांकन से संबंधित शासन निर्णयों में सुधार
- सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना कर्मचारियों पर फौजदारी मामले दर्ज न करना
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आम जनता और किसानों की बढ़ीं मुश्किलें
हड़ताल के कारण कार्यालय में जमीन की पैमाइश, फेरफार, सीमांकन, नक्शे और उतारा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह बंद हैं। इसका सीधा असर किसानों, बिल्डरों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कृती समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।
