विज्युक्टा का हल्लाबोल: कनिष्ठ महाविद्यालयीन शिक्षकों ने संच मान्यता के ‘काले मसौदे’ के खिलाफ धरना
Vijukta Teachers Protest: विज्युक्टा के नेतृत्व में कनिष्ठ महाविद्यालयीन शिक्षकों ने सरकार के नए ऑनलाइन संच मान्यता ड्राफ्ट के विरोध में नागपुर शिक्षा उपसंचालक कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया।
Teachers Protest (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Maharashtra Education Department: सरकार ने हजारों अनुदानित और आंशिक अनुदान प्राप्त कनिष्ठ महाविद्यालय शिक्षकों के कार्यभार को कम करके निर्धारित अनुमोदन का मसौदा तैयार किया है। इसके विरोध में विज्युक्टा के महासचिव डॉ. अशोक गव्हाणकर के नेतृत्व में नागपुर में शिक्षा उपसंचालक कार्यालय के सामने धरना दिया गया। इसमें जिले से बड़ी संख्या में कनिष्ठ महविद्यालय के शिक्षकों ने भाग लिया। पिछले 50 वर्षों से कनिष्ठ महाविद्यालयों के संच मान्यता स्कूल संहिता और समयसमय पर जारी सरकारी आदेशों के अनुसार, सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की जाती थी।
लेकिन, 202526 ऑनलाइन संच मान्यता के मसौदे में संच मान्यता के प्रचलित मानदंडों को छोड़ दिया गया है। इससे राज्य के हजारों शिक्षकों पर काम का बोझ कम हो गया है। प्रशासन ने मनमाने ढंग से प्रचलित मानदंडों को कमजोर कर दिया है और अनुमोदनों का एक बहुत ही गलत और अनुचित संच तैयार किया है।
ऑनलाइन संच मान्यता ड्राफ्ट को बताया दमनकारी
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने इस काले मसौदे का विरोध किया और आरोप लगाया कि यह शिक्षा, शिक्षकों और छात्रों के साथ अन्याय है। विजुक्टा के जिला अध्यक्ष प्रा. पवन कटरे, सचिव प्रा. अरविंद शरणागत, प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रा. रोमेंद्र बोरकर, केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रा. जागेश्वर भेंडारकर, प्रा. संजय कलंबे, रवि रहांगडाले, बबन मेश्राम, प्रा. टोपराम बावनकर, मिलिंद चौधरी, प्रवीण रहांगडाले, बिसेन, लंजे, गौतम, शेंद्रे आदि आंदोलन में शामिल हुए।
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शिक्षा उपसंचालक कार्यालय पर प्रदर्शन
धरना आंदोलन में शामिल सभी शिक्षकों का संघ के जिला अध्यक्ष प्रा कटरे ने आभार माना। इस वर्ष की स्वीकृति को प्रचलित मानदंडों के आधार पर संशोधित किया जाए, इस वर्ष की स्वीकृति उप शिक्षा संचालक कार्यालय के स्तर पर ऑफलाइन की जाए, विषय का कार्यभार, प्रैक्टिकल और अध्ययन के संबंध में छात्रों की न्यूनतम संख्या, बैच बनाए रखने के लिए प्रचलित मानदंड, सभी प्रवेशित छात्रों को स्वीकार किया जाए, आदि मांग की गई।
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किसानों पर आर्थिक संकट
अब यांत्रिकीकरण से खेती सरल हो गई है फिर भी वर्तमान दौर में विभिन्न यंत्रों की कीमत बढ़ी है, इन यंत्रों में लगने वाले डीजल, पेट्रोल के दर किसानों के बूते नहीं है, कृषि के लिए कीटनाशक की कीमत बहुत बढ़ गई है। पाइप, मजदूरी की दर में वृध्दि हुई है, इसी तरह विद्युत बिल व अन्य वस्तुओं की कीमत बढ़ने से जुताई का खर्च भी बढ़ गया है।
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ऑफलाइन संच मान्यता और पुराने मानदंडों को बहाल करने की मांग
इस सबसे बड़ी समस्या मजदूरों की है। खोज करने के बाद भी मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मिल भी गए तो कम समय में बड़ी मजदूरी चुकानी पड़ती है।
निर्माण सामग्री से हो रही दुर्घटनाएं
तिरोड़ा शहर में इन दिनों शासकीय निर्माण कार्य से लेकर निजी निर्माण कार्य चल रहे हैं। जिसमें रोड पर निर्माण सामग्री को अस्तव्यस्त रूप से रखा गया है। उसके कारण आवागमन बाधित हो जाता है वहीं दुर्घटना होने का डर बना रहता है। शहर के मुख्य मार्गों सहित वार्डों में मकान बनाने के लिए लोगों ने सड़कों पर निर्माण सामग्री डाल रखा है, जिसकी वजह से रोजाना आवागमन करने वालों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
