प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Public Health Department: नासिक राज्य के सरकारी अस्पतालों में फ्री इलाज की सुविधा बंद कर दी गई है। इस बारे में पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट का सरकारी फैसला जारी किया गया और एक रिवाइज्ड और अपडेटेड ‘सिटिजन्स चार्टर’ पब्लिश किया गया है।
इसके मुताबिक, अब मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पैसे देने होंगे। भले ही नागरिक थोड़ी रकम देने को तैयार हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इलाज की क्वालिटी कब बदलेगी।
सरकार ने हर सर्विस के लिए रेट तय कर दिए हैं। केस पेपर 5 रुपये, मरीज के भर्ती होने की फीस 10 रुपये, ब्लड टेस्ट 15 रुपये, एक्स-रे 30 रुपये, सीटी स्कैन 400 रुपये, एमआरआई 1600 रुपये, आयसीयू 100 रुपये, एम्बुलेंस फीस 5 रुपये प्रति किमी, इंटेसिव केयर यूनिट 100 रुपये प्रति दिन।
जॉइंट ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी सर्जरीः 40,000 रुपये तक होगी। बुनियादी मामलों की फीस बहुत कम है। हालांकि, इस बात पर शक है कि बहुत गरीब लोगों के लिए जांच की फीस कितनी सस्ती होगी।
राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि स्वास्थ्य के अधिकार के तहत राज्य के प्राइमरी हेल्थ सेंटर, ग्रामीण अस्पतालों, सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालो और जिला अस्पतालों में सभी तरह का इलाज मुफ्त दिया जाएगा, हालांकि, अब इस फैसले को बदल दिया गया है।
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नए नियमों के मुताबिक, अब मरीजों को इलाज के टाइप के आधार पर एक तव फीस देनी होगी, सरकारी अस्पतालों में ढाई साल से चल रही ‘घडी इलाज’ स्कीम अब पुरानी बात होने जा रही है। राज्य के हेल्थ डिपार्टमेट ने अपने पहले के फैसले से यू-टर्न लेते हुए अब केस पेपर्स से लेकर बडी सर्जरी तक सभी सर्विसेज के लिए फीस लेने का फैसला किया है।