पश्चिमल रेलवे (सौ,. सोशल मीडिया )
Western Railway Hay Supply: मुंबई से देश के उत्तरी और पश्चिमी सैन्य ठिकानों तक सूखी घास (हे) की निरंतर आपूर्ति में वेस्टर्न रेलवे अहम कड़ी बना हुआ है।
सेना के पशुधन और लॉजिस्टिक जरूरतों के लिए भेजी जा रही इस खेप की ढुलाई उत्तर भारत के संवेदनशील स्टेशनों उधमपुर, भुज और अन्य सैन्य क्षेत्रों तक की जा रही है।
यह ऑपरेशन न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि रेलवे के लिए राजस्व का भी स्थिर स्रोत साबित हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 में पश्चिम रेलवे ने 29,250 टन हे की ढुलाई की, जिससे 3.40 करोड़ रुपये से अधिक का मालभाड़ा राजस्व मिला। 2020-21 में मात्रा घटकर 27,836 टन रही, लेकिन राजस्व बढ़कर करोड़ 3.61 रुपये हुआ। 2021-22 में 21,285 टन की ढुलाई से 3.12 करोड़ रुपये अर्जित किए गए।
हाल के वर्षों में मात्रा में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2023 में 2,652 टन और 2024 में 3,986 टन हे भेजा गया। दिसंबर 2025 में 368 टन तथा जनवरी 2026 में 420 टन की खेप रवाना की गई। यह सप्लाई बरेली जंक्शन, न्यू तिनसुकिया जंक्शन, रंगिया जंक्शन, बरबिल, धुपगुडी, भुज जैसे डेस्टिनेशन स्टेशनों तक पहुंचाई गई।
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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सैन्य सामग्री की दुलाई को प्राथमिकता श्रेणी में रखा जाता है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके, विशेष रेक प्लानिग और लॉजिस्टिक समन्वय के जरिए इस प्रक्रिया को सुचारु रखा जाता है। रणनीतिक दृष्टि से यह दुलाई सीमावर्ती इलाकों में तैनात बलों के लिए अहम है, जहां पशुधन और सहायक इकाइयों के संचालन में हे की आवश्यकता होती है।