कुंभ मेले से पहले गोदावरी के प्रदूषण पर छिड़ी जंग, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
Godavari River Pollution: सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले गोदावरी नदी के गंभीर प्रदूषण पर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें नदी के पात्र पर 'नदी स्नान के योग्य नहीं'।
- Written By: आंचल लोखंडे
Godavari River Pollution (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Kumbh Mela 2026: दक्षिण गंगा मानी जाने वाली गोदावरी नदी के प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला अब कुछ ही समय दूर है, लेकिन नदी की वर्तमान स्थिति को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। प्रदूषण की इसी गंभीर समस्या को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा दायर याचिका में एक चौंकाने वाली मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि गोदावरी का पानी इस कदर प्रदूषित हो चुका है कि यह मानवीय उपयोग, विशेषकर ‘शाही स्नान’ के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि नदी के पात्र (तट) पर स्पष्ट रूप से चेतावनी के बोर्ड लगाए जाएं। इन बोर्डों पर लिखा हो कि “नदी का पानी स्नान के लिए योग्य नहीं है। नाशिक में होने वाला कुंभ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
‘नदी स्नान के योग्य नहीं’ के बोर्ड लगाने की मांग
कुंभ के दौरान लाखों लोग पवित्र डुबकी लगाने आते हैं। ऐसे में यदि नदी का जल प्रदूषित रहता है, तो यह न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करेगा, बल्कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकता है। प्रशासन के लिए यह स्थिति ‘ऐरणीवर’ (अत्यंत नाजुक) आ गई है। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट इस याचिका पर क्या निर्णय सुनाएगा, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन प्रशासन द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और नदी स्वच्छता के दावों पर इस याचिका ने बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
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गोदावरी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान
अदालती कार्यवाही अपनी जगह है, लेकिन यह खबर एक बड़ा सामाजिक प्रश्न भी खड़ा करती है। गोदावरी हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है। यदि हम अपनी ‘जीवनदायिनी’ नदी को स्वच्छ नहीं रख सकते, तो इसके लिए केवल सरकार को दोष देना पर्याप्त नहीं है। आज गोदावरी को बचाने के लिए केवल कानूनी लड़ाई की नहीं, बल्कि जन-भागीदारी और आत्म-परीक्षण की आवश्यकता है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कुंभ मेले की दिव्यता पर प्रदूषण का साया भारी पड़ सकता है।
