मुंबई-पुणे-हैदराबाद हाईस्पीड रेल परियोजना पर बढ़ी सियासत, ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी

Mumbai Pune Hyderabad High Speed Rail परियोजना को लेकर पुणे जिले में विकास और राजनीति दोनों गरमा गई हैं। जहां शहरी क्षेत्रों में उत्साह है, वहीं ग्रामीण इलाकों में उपेक्षा को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
Mumbai Pune Hyderabad High Speed Rail
बुलेट ट्रेन (Image- Social Media)
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Mumbai Pune Hyderabad High Speed Rail: मुंबई-पुणे-हैदराबाद प्रस्तावित हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट ने पुणे जिले की राजनीति और विकास चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। प्रारंभिक प्रस्ताव में लोणावला, कुरुली, लोणी और बारामती क्षेत्र में स्टेशन बनने की संभावना जताई जा रही है।

इससे शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है, लेकिन दूसरी ओर आंबेगांव, जुन्नर और संगमनेर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी बढ़ने लगी है।

जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित हाईस्पीड रेल मार्ग पुणे शहर के बाहरी हिस्सों से होकर बारामती की ओर आगे बढ़ सकता है। इससे मुंबई, पुणे और हैदराबाद के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना से उद्योग, निवेश, पर्यटन और व्यापार को गति मिलेगी।

लंबे समय से रेल संपर्क की मांग

राज्य के पश्चिम और उत्तर भागों के बीच तेज संपर्क व्यवस्था भी विकसित हो सकेगी। नागरिकों का कहना है कि नई परियोजना में उनके हिस्से की वर्षों पुरानी रेल अपेक्षाएं फिर अधूरी रह जाएंगी। आंबेगांव, जुन्नर और संगमनेर क्षेत्र लंबे समय से रेल संपर्क की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि भविष्य की किसी बड़ी रेल परियोजना में इन क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा।

कई ग्रामीण संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

कई ग्रामीण संगठनों का कहना है कि यदि हाईस्पीड रेल परियोजना में उनके क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया, तो भविष्य में आंदोलन किया जाएगा, स्थानीय नागरिकों का मानना है कि, पुणे जिले का संतुलित विकास तभी संभव है, जब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को समान प्राथमिकता मिले, विशेषज्ञों का कहना है कि हाईस्पीड रेल जैसी परियोजनाएं केवल तेज यात्रा का माध्यम नहीं होती। बल्कि उनके आधार पर आने वाले कई दशकों की आर्थिक और सामाजिक दिशा तय होती है, ऐसे में परियोजना का लाभ अधिकाधिक क्षेत्रों तक पहुंचाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

"आंबेगाव, जुन्नर और संगमनेर मार्ग से रेल सेवा शुरू होने की उम्मीद पिछले कई वर्षों से जताई जा रही थी। लेकिन नए हाईस्पीड रेल प्रस्ताव के बाद ग्रामीण क्षेत्रों को फिर नजरअंदाज किए जाने की भावना पैदा हुई है।"

- मोहन थोरात, उद्यमी, चाडोली-पुणे

विकास केवल शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। दूरदराज क्षेत्रों को भी न्याय मिलना जरूरी है। पिछले 20 वर्षों से रेल प्रोजेक्ट की चर्चा हो रही है। आआंबेगांव और जुन्नर क्षेत्र के विकास के लिए रेल संपर्क बेहद आवश्यक है।"

- प्रवीण बढेकर, बढेकर ग्रुप, पारगांव-पुणे

ग्रामीण क्षेत्रों को भी समान अवसर मिलना जरूरी

अब प्रस्तावित बुलेट ट्रेन मार्ग में इन तालुको का नाम सामने नहीं आने से निराशा का वातावरण है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास केवल बड़े शहरों और औद्योगिक पट्टियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। डोंगरी और ग्रामीण क्षेत्रों को भी समान अवसर मिलना जरूरी है।

लोगों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ा जाए तो रोजगार, कृषि व्यवसाय, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। रेल मंत्रालय की ओर से अभी अंतिम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।

इसलिए परियोजना का अंतिम मार्ग, स्टेशन और तकनीकी स्वरूप आने वाले समय में स्पष्ट होगा, बावजूद इसके, प्रस्तावित मार्ग को लेकर राजनीतिक हलकों और ग्रामीण भागों में वर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, आने वाले समय में यह मुद्दा पुर्ण जिले की राजनीति में अहम स्थान ले सकता है।

एक और शहरी भाग हाईस्पीड रेल को विकास का प्रतीक मान रहे है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र समान भागीदारी और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस परियोजना को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी भूमिका स्पष्ट करनी शुरू कर दी है।

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