गोदावरी के कंक्रीटीकरण पर राजेंद्र सिंह का जुबानी हमला, बोले- यह विकास नहीं, भविष्य में संकट को न्योता

Godavari River Nashik: नासिक में जल विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह ने गोदावरी के कंक्रीटीकरण पर सवाल उठाए। उन्होंने नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जैव विविधता को बचाने की मांग की।
godavari river concretization rajendra singh nashik
गोदावरी नदी नासिक (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Godavari River Concretization: गोदावरी नदी का कंक्रीटीकरण विकास नहीं, बल्कि ठेकेदारों और राजनेताओं के हितों का खेल है। जल विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने गोदावरी के कंक्रीटीकरण को लेकर प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, कंक्रीटीकरण में ठेकेदारों का पैसा होता है। इसलिए इसमें राजनेताओं की भी बड़ी दिलचस्पी रहती है। कंक्रीटीकरण का काम करना आसान होता है, इसलिए सभी का ध्यान इसी तरह के कामों पर रहता है।

उन्नत नासिक अभियान के तहत पंचवटी स्थित कै। सदाशिव भोरे नाट्यगृह में पर्यावरणसमृद्ध नासिक और हरित कुंभ की दिशा में जनभागीदारी विषय पर विशेष सभा आयोजित की गई थी। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. सिंह ने गोदावरी के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नदी को कंक्रीट की दीवारों में कैद करने के बजाय उसके प्राकृतिक प्रवाह, नदी पात्र, मिट्टी, वनस्पति और जैव विविधता को बचाना जरूरी है।

गोदावरी को कंक्रीट में कैद करने पर जताई चिंता

नदी का अस्तित्व केवल पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पात्र की मिट्टी, आसपास की वनस्पति और पूरी जैव विविधता में उसका जीवन बसता है। नदी के पात्र में कंक्रीट डालने से उसका प्राकृतिक स्वरूप नष्ट होता है और नदी के मृतप्राय होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए विकास के नाम पर नदी का प्राकृतिक चरित्र नष्ट नहीं किया जाना चाहिए, ऐसा स्पष्ट मत डॉ. सिंह ने व्यक्त किया।

सिंहस्थ कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में गोदावरी किनारे शुरू विभिन्न विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर गोदावरी को कंक्रीट मुक्त करने की मांग वर्षों से की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नदी पात्र में ही बड़े पैमाने पर सीमेंट-कंक्रीट के काम होने से पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी है।

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सिंहस्थ से पहले गरमाया मुद्दा

गोदावरी के 17 प्राकृतिक स्रोतों के पुनर्जीवन का मुद्दा वर्षों से लंबित है। गोदाप्रेमी सेवा समिति के देवांग जानी नदी का प्राकृतिक स्वरूप बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। पांच कुंडों में से कुछ का काम पूरा हुआ है, जबकि रामगया, खंडोबा और पेशवा कुंड सहित अन्य क्षेत्रों का काम अभी भी अधूरा है। सिंहस्थ के नाम पर यदि नदी पात्र में कंक्रीटीकरण बढ़ाया गया तो यह विकास नहीं, बल्कि भविष्य के संकट को न्योता देने जैसा होगा।

प्राकृतिक स्वरूप बचाने की मांग

नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आने से बाढ़ के दौरान पानी के बहाव और निकासी पर असर पड़ सकता है, जिससे खतरा बढ़ने की आशंका है। गोदावरी के कंक्रीटीकरण को रोकने के लिए डॉ. सिंह पहले ही आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं। विश्व सूखा एवं बाढ़ आयोग के कार्य में व्यस्त होने के कारण वे लंबे समय बाद नासिक पहुंचे। उन्होंने कहा कि गोदावरी से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को पालकमंत्री और संबंधित प्रशासन के संज्ञान में फिर से लाया जाएगा। ऐसे में सिंहस्थ से पहले गोदावरी के कंक्रीटीकरण का मुद्दा एक बार फिर गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।

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