गोदावरी (सौ. सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Corporation: नासिक की जीवनरेखा गोदावरी नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा गठित समिति ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। समिति के सदस्य निशिकांत पगारे ने विभागीय आयुक्त को पत्र लिखकर नाशिक महानगरपालिका के उन अधिकारियों के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है, उन्होंने जानबूझकर नदी में सीवर (गटर) का पानी छोड़ा है।
शिकायत पत्र के अनुसार, नासिक मनपा के अधिकारियों ने स्वयं लिखित रूप में स्वीकार किया है कि तकनीकी कारणों से गंदा पानी नदी में मिल रहा था। पिछले तीन महीनों से टाकली के पास सीवर चेंबर को तोड़कर एक नाली के जरिए गंदा पानी सीधे गोदावरी में बहाया जा रहा था।
हाईकोर्ट और नीरी के आदेशों की अवमानना करने वाले अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो। भविष्य में ऐसी ‘शरारत’ न हो, इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पवित्रता को बनाए रखने के लिए स्थायी समाधान किया जाए। इस पत्र के बाद अब प्रशासन और नासिक पुलिस विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि क्या वे अपने ही विभाग के बड़े अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे?
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नासिक मनपा का यह कृत्य नदी के साथ शरारत की श्रेणी में आता है। इसमें नदी को प्रदूषित करना, प्रवाह में बाधा डालना या जानबूझकर रसायन डालना दंडनीय है। उच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित समिति के सदस्य पगारे का स्पष्ट कहना है कि जब तक दोषी अधिकारियों पर सीधे मुकदमे दर्ज नहीं होंगे, तब तक गोदावरी नदी कभी प्रदूषण मुक्त नहीं होगी। अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों और ‘नीरी’ जैसी संस्थाओं के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन किया है।