नासिक की Gen-Z का हल्लाबोल, विकास चाहिए या ऑक्सीजन? मास्क पहनकर युवाओं ने प्रशासन को घेरा
Nashik Tree Protest News: नासिक में पेड़ों की कटाई और दमघोंटू विकास के खिलाफ 'पीपल्स ट्री सिटीजन मूवमेंट' ने मोर्चा निकाला। 400 साल पुराने पेड़ों की कटाई पर जेन-जी युवाओं ने जताया कड़ा विरोध।
- Written By: गोरक्ष पोफली
विरोध प्रदर्शन की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: AI फोटो)
Nashik Tree Protest: नासिक की आबोहवा में अब केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति भारी आक्रोश भी घुल चुका है। विकास के नाम पर पहाड़ों के विनाश और हजारों पुराने पेड़ों की बलि चढ़ाने की प्रशासन की नीतियों के खिलाफ आज नासिक की सड़कों पर एक ऐतिहासिक संग्राम देखने को मिला। ‘पीपल्स ट्री सिटीजन मूवमेंट’ के बैनर तले बी.वाई.के. कॉलेज से राजीव गांधी भवन (मनपा मुख्यालय) तक निकाले गए इस विशाल मोर्चे ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
ऑक्सीजन मास्क और ‘जेन-जी’ का आक्रोश
इस आंदोलन की सबसे मार्मिक और गंभीर तस्वीर तब सामने आई जब ‘जेन-जी’ यानी आज की युवा पीढ़ी के छात्र चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क पहनकर और हाथों में प्रतीकात्मक ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर सड़क पर उतरे। युवाओं का संदेश साफ था “अगर आज पेड़ नहीं बचे, तो कल हमें इसी तरह सांसों के लिए तरसना पड़ेगा।” प्रदर्शनकारियों ने हाथों में केले लेकर एक अनोखा विरोध दर्ज कराया, जो सीधे तौर पर राजनीतिक जवाबदेही और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि ‘हरित कुंभ’ के नाम पर नासिक को ‘कंक्रीट के जंगल’ में तब्दील किया जा रहा है।
400 साल पुराने पेड़ों की ‘हत्या’ और अदालती आदेशों की अवमानना
आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए बरगद, पीपल और गूलर जैसे प्राचीन और पवित्र पेड़ों को काटा जा रहा है। विशेष रूप से एक 400 साल पुराने वटवृक्ष को जिस निर्दयता से काटा गया, उसने नागरिकों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। आरोप है कि वृक्ष प्राधिकरण समिति का गठन किए बिना ही मनमाने ढंग से पेड़ों को ‘बाधा’ घोषित कर उन्हें हटाया जा रहा है।
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महापौर की अनुपस्थिति और बढ़ता जनसमर्थन
जब आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर महापौर से मिलने पहुंचा, तो उनकी अनुपस्थिति ने आग में घी डालने का काम किया। नागरिकों ने इसे जनता की भावनाओं के प्रति नासिक प्रशासन की ‘संवेदनहीनता’ करार दिया। इस मुहिम से अब तक 5000 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं और एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। ये हस्ताक्षर जल्द ही राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) को सौंपे जाएंगे।
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राजनीतिक और सामाजिक एकजुटता
इस मोर्चे में केवल पर्यावरण प्रेमी ही नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी शामिल हुए। ‘पीपल्स ट्री सिटीजन मूवमेंट‘ के आनंद रॉय, मानसी सरदेसाई और डॉ. कविता देवरे के साथ सीपीआई, सीपीएम, मनसे और संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ता भी इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखे। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि पर्यावरण की रक्षा की मांग करने वाले नागरिकों को ‘विकास विरोधी’ कहना बंद किया जाए। यह लड़ाई केवल पेड़ों की नहीं, बल्कि नासिक की आने वाली पीढ़ियों के ‘हक की सांसों’ की है।
