नासिक में ईंधन संकट से हाहाकार: 65 फीसदी पेट्रोल पंपों पर लटका ताला, तेल कंपनियों के दबाव में प्रशासन मौन
Nashik Fuel Crisis: नासिक जिले में ईंधन की किल्लत से 65% पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं। प्रशासन तेल कंपनियों पर कार्रवाई करने के बजाय स्थानीय उद्यमियों को निशाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है।
- Written By: रूपम सिंह
पेट्रोल पंप (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nashik Petrol Pump Closure Fuel Crisis: नासिक जिले में पिछले दो महीनों से ईंधन की किल्लत ने आम जनजीवन, व्यापार और उद्योगों के आर्थिक चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंभीर बात यह है कि इस संकट के बावजूद प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालक इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि तेल कंपनियों के भारी दबाव के कारण दोनों पक्ष सच बोलने से बच रहे हैं।
- जिले की स्थिति: 65 फीसदी पंपों पर लगा ताला पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ईंधन की भारी कमी के कारण जिले के पंपों का संचालन बुरी तरह चरमरा गया है।
- शहरी क्षेत्र: करीब 25 प्रतिशत पंप ईंधन के अभाव में बंद हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रः ग्रामीण इलाकों में 40 प्रतिशत पंप बंद पड़े हैं। जिले के लगभग 65 प्रतिशत पेट्रोल पंप वर्तमान में बंद हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
आपूर्ति विभाग, जिस पर इस संकट के समाधान की जिम्मेदारी है, वह अब उद्यमियों को ही इस समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता दिख रहा है। प्रशासन द्वारा उद्योगों में तेल स्टॉक की जांच की घोषणा भी केवल दिखावा साबित हुई है। पिछले दो दिनों में हुई तीन स्थानों पर जांच में कोई भी संदिग्ध बात सामने नहीं आई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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प्रशासन स्थानीय उद्यमियों को बना रहा है निशाना
प्रशासन द्वारा पेट्रोल- डीजल की किल्लत का दोष उद्योगों पर मढ़ना और उन्हें धमकाना कहीं से भी तार्किक नहीं है। यदि बाजार में माल की आपूर्ति कम है और खरीदार अपनी आवश्यकता के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं, तो इसे व्यापारिक नियमों के तहत गलत ठहराना अनुचित है। प्रशासन समस्या की जड़ यानी तेल कंपनियों की आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के बजाय उद्यमियों को निशाना बना रहा है।।
