बागलाण में बेमौसम-सूखे का संकट, किसानों को तुरंत राहत देने के लिए कड़े नियमों में ढील की मांग

Baglan Agricultural Crisis: बागलाण को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद राकांपा (शरद) ने किसानों को तत्काल राहत देने की मांग की। पार्टी ने 3 हेक्टेयर तक समान मुआवजा देने की मांग विधायक बोरसे से की।
baglan drought farmers compensation 3 hectares
बागलाण सूखाग्रस्त(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Baglan Farmers Relief Demand: बागलाण तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद अब प्रभावित किसानों को सीधी और त्वरित वित्तीय सहायता पहुंचाने के लिए सरकारी नियमों में दर्ज पंचनामा, फसल निरीक्षण, फोटो और जीपीएस-आधारित डेटा संग्रह जैसे कड़े प्रशासनिक व तकनीकी मानदंडों को शिथिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही बागलाण के किसानों को कम से कम तीन हेक्टेयर तक एकसमान मुआवजा दिए जाने का आग्रह राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद) पार्टी के बागलाण तहसील एवं सटाणा शहर के पदाधिकारियों ने विधायक दिलीप मंगळू बोरसे से किया है।

इस संदर्भ में पार्टी के प्रतिनिधियों ने विधायक बोरसे को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बागलाण को सूखाग्रस्त घोषित कराने के लिए शासन स्तर पर किए गए प्रयासों के लिए विधायक बोरसे का आभार व्यक्त किया गया है। हालांकि, इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल सूखा घोषित होना ही मदद की अंतिम मंजिल नहीं है, बल्कि वास्तविक रूप से प्रभावित किसानों के हाथों तक उचित राहत राशि पहुंचना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

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3 हेक्टेयर तक बिना शर्त मुआवजा देने का आग्रह

बागलाण तहसील की अधिकांश खेती बारिश पर निर्भर है। इस वर्ष अनिश्चित व कम बारिश, फसलों को हुए भारी नुकसान, बढ़ती उत्पादन लागत और हाथ से निकल चुकी उपज के कारण किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। ऐसी स्थिति में पंचनामा, तकनीकी निकषों या अन्य प्रशासनिक खामियों के कारण पात्र किसान सहायता से वंचित रह सकते हैं। इसलिए सरकार को किसानों के वास्तविक नुकसान को केंद्र में रखकर ही मदद वितरण की प्रक्रिया चलानी चाहिए।

राकांपा (शरद) ने विधायक दिलीप बोरसे को सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन में मांग की गई है कि मौजूदा नियमों की जटिल शर्तों व तकनीकी मानदंडों को आसान बनाकर कम से कम तीन हेक्टेयर तक मुआवजा देने का ठोस प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा जाए और इसका प्रभावी ढंग से पीछा किया जाए। साथ ही, प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं कि केवल तकनीकी कारणों से कोई भी पात्र किसान सहायता पाने से वंचित न रहे। सूखा केवल एक प्राकृतिक आपदा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आजीविका का सवाल है।

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अधिकारियों की जवाबदेही हो तय

एक भी पात्र किसान मदद से छूटना नहीं चाहिए, यह स्पष्ट रुख राकांपा (शरद) ने अपनाया है। इस बीच, ज्ञापन में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि सूखा घोषित होने के बावजूद बागलाण के किसान प्रत्यक्ष राहत पाने से वंचित रहते हैं, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इस ज्ञापन पर राकांपा (शरद) पार्टी के तहसील अध्यक्ष केशव मांडवडे, कार्याध्यक्ष संजय पवार, सटाणा शहराध्यक्ष भारत काटके, कार्याध्यक्ष मनोज (छोटू) सोनवणे, तहसील अध्यक्ष चेतन वणीस और सटाणा शहर राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के अध्यक्ष मयुर अहिरे के हस्ताक्षर हैं।

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