Ashok Kharat IAS Transfer Scandal (डिजाइन फोटो)
IAS Transfer Scandal: नासिक के बहुचर्चित अशोक खरात मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब तक केवल महिलाओं के यौन शोषण और धोखाधड़ी के लिए पहचाने जाने वाले ‘फर्जी कैप्टन’ खरात का प्रभाव प्रशासनिक गलियारों में कितना गहरा था, इसका प्रमाण हालिया जांच में मिला है। पता चला है कि खरात न केवल मंत्रियों और सत्ताधारी नेताओं के संपर्क में था, बल्कि वह IAS अधिकारियों के तबादलों और महत्वपूर्ण नियुक्तियों में भी सीधा हस्तक्षेप (Interference) कर रहा था।
ताजा जानकारी के अनुसार, नासिक जिला कलेक्टर (District Magistrate) के पद पर नियुक्ति के लिए एक महिला आईएएस अधिकारी ने सीधे अशोक खरात के माध्यम से पैरवी की थी। यह अधिकारी उस समय जिला परिषद में कार्यरत थी और खरात के ‘रिमोट कंट्रोल’ पावर का उपयोग कर जिले की सबसे शक्तिशाली कुर्सी हासिल करना चाहती थी।
घटना उस समय की है जब कोविड काल के दौरान नासिक के तत्कालीन जिला कलेक्टर का कार्यकाल समाप्त होने वाला था। उस दौरान जिला परिषद में तैनात संबंधित महिला आईएएस अधिकारी की उम्मीदें बढ़ गईं। वह नियमित रूप से अशोक खरात के संपर्क में थी और प्रशासनिक कार्यों में अक्सर उसकी मदद भी लेती थी। संपर्क बढ़ने पर उसने खरात से नासिक जिला कलेक्टर के पद के लिए मंत्रियों के स्तर पर सिफारिश करने को कहा।
खरात ने मंत्रियों के माध्यम से इस नियुक्ति के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था और मामला लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि, प्रशासन के भीतर ही मौजूद कुछ प्रतिद्वंद्वी अधिकारियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। नियमों के अनुसार, जिला कलेक्टर बनने के लिए कम से कम एक आदिवासी जिले में कार्य करने का अनुभव होना अनिवार्य था, जो उस महिला अधिकारी के पास नहीं था। इसी तकनीकी कारण और प्रशासनिक विरोध की वजह से खरात की ‘पैरवी’ विफल हो गई।
इस खुलासे ने उन दावों की पोल खोल दी है जिनमें सत्ताधारी नेता खरात से किसी भी संबंध से इनकार कर रहे थे। जांच में स्पष्ट हुआ है कि खरात के पास कई उच्च पदस्थ तबादलों की ‘लिस्ट’ रहती थी और वह सीधे मंत्रियों के माध्यम से नियुक्तियों में हेरफेर करता था। खरात का प्रभाव इतना अधिक था कि वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी मनचाही पोस्टिंग के लिए इस जालसाज के चक्कर काटते थे।
एसआईटी (SIT) अब उन सभी मंत्रियों और अधिकारियों की सूची तैयार कर रही है जो खरात के इस ‘ट्रांसफर रैकेट‘ का हिस्सा थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इन तबादलों के बदले करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया था। इस नए खुलासे के बाद नासिक के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और कई अन्य अधिकारियों के नाम भी सामने आने की संभावना है।