विकास लवांडे व सुनील तटकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sharad Pawar Faction Targets Sunil Tatkare: महाराष्ट्र की राजनीति में अशोक खरात नामक स्वयंभू बाबा का मामला अब एक बड़े राजनीतिक बवंडर का रूप ले चुका है। नासिक से शुरू हुआ यह विवाद अब सीधे तौर पर सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की साख पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। इस मामले की सबसे पहली और बड़ी गाज रुपाली चाकणकर पर गिरी, जिन्हें राज्य महिला आयोग की अध्यक्षता और पार्टी के महिला प्रदेशाध्यक्ष पद, दोनों से ही हाथ धोना पड़ा है।
शरद पवार गुट के प्रवक्ता विकास लवांडे ने इस मामले में सीधे एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे को निशाने पर लिया है। विकास लवांडे ने कहा कि अशोक खरात ने कई महिलाओं का शोषण किया है और उसे सजा मिलनी चाहिए, रुपाली चाकणकर ने पद से इस्तीफा तो दिया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं। उन्हें सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही सुनील तटकरे को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाना जरूरी है क्योंकि दोनों का खरात से नियमित संपर्क रहा है।
इस विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब लवांडे ने सिन्नर के विधायक माणिकराव कोकाटे का जिक्र किया। आरोप है कि अशोक खरात के प्रभाव के कारण ही माणिकराव कोकाटे को मंत्री पद से वंचित रखा गया। लवांडे के अनुसार, खरात ने सुनील तटकरे पर दबाव बनाया था कि कोकाटे को कैबिनेट में जगह न मिले। अब जनता और विपक्षी दल तटकरे और कोकाटे से इस पर स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खरात जैसे होंगी को आखिर किसने पाला-पोसा? और पिछले 16 वर्षों से महिलाओं के शोषण की बात सामने आ रही है। अंधारे ने कहा कि इस पूरे मामले में आर्थिक पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए और इसके लिए वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग करेंगी।
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सुषमा अंधारे ने स्पष्ट किया कि रुपाली चाकणकर का महिला आयोग और एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा एक साथ हो सकता था, लेकिन आयोग का इस्तीफा मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुआ, इसमें सुनील तटकरे की कोई भूमिका नहीं थी। सुषमा अंधारे ने कहा कि चाकणकर का महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा सुनेत्रा पवार ने पार्टी के अंदरूनी असतोष को देखते हुए लिया।