बारामती विमान हादसा: छगन भुजबल ने दी भावुक श्रद्धांजलि, बोले- राजनीति का चमकता सितारा बुझ गया
NCP Leader Ajit Pawar: बारामती में विमान दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र स्तब्ध है। छगन भुजबल ने इसे राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Maharashtra Deputy CM Death: नासिक महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बुधवार का दिन अत्यंत स्तब्ध करने वाला और काला साबित हुआ। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार का बारामती में एक भीषण विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। इस हृदयविदारक समाचार से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है और राजनीतिक गलियारे पूरी तरह सुन्न हैं।
वरिष्ठ मंत्री छगन भुजबल ने इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति का एक चमकता
सितारा असमय बुझ गया है। भुजबल ने कहा कि दादा के साथ मेरा रिश्ता केवल एक राजनीतिक सहयोगी का नहीं, बल्कि उससे कहीं बढ़कर था। कल ही कैबिनेट की बैठक में हम साथ थे, महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की थी।
नियति इतनी क्रूर हो सकती है, यह कभी सोचा न था। 2014 के कठिन समय में दादा ने मेरे परिवार को जो संबल दिया, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता, मतभेदों के बावजूद उन्होंने हमेशा मेरा सम्मान किया। प्रशासनिक अनुशासन और ‘अजित’ कार्यशैली: अजित पवार अपनी कड़क अनुशासनप्रियता के लिए पूरे देश में विख्यात थे।
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वे प्रतिदिन सुचह 5 बजे अपना कामकाज शुरू कर देते थे। जब दुनिया जाग रही होती थी, तब दादा जनता की समस्याओं का निपटारा कर रहे होते थे। ‘काम की बात करो’ वाला उनका स्पष्टवादी रवैया नौकरशाही में अनुशासन बनाए रखता था।
रिकॉर्ड 11 बार बजट और ऐतिहासिक निर्णय
1991 से बारामती की कमान संभालने वाले दादा ने रिकॉर्ड 11 बार बजट पेश कर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। कोरोना काल में फंड की कमी न होने देना, गरीबों को मुफ्त शिवभोजन थाली और महिलाओं के लिए महावितरण में ‘लाइन-वुमन’ पद की शुरुआत करना उनकी दूरदर्शी सोच का परिणाम था।
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कर्मठ लोकनेता, अटूट साहस को कभी नहीं भूलेगा
शरद पवार के मार्गदर्शन में तैयार हुए अजित पवार ने 1995 से लगातार विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड जीत दर्ज की, बारामती के विकास से लेकर महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा, उनके निधन से आदरणीय शरद पवार साहब, सुनेत्रा वहिनी, पार्थ और जय पवार सहित लाखों समर्थकों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, महाराष्ट्र अपने इस कर्मठ लोकनेता और उनके अटूट साहस को कभी नहीं भूलेगा।
