नांदेड स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर अबिचलनगर साहिब (सोर्स: सोशल मीडिया)
Guru Teg Bahadur Shaheedi Diwas In Nanded: नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी समागम के लिए नांदेड़ प्रशासन पूरी तरह तैयार है। 24 और 25 जनवरी को आयोजित होने वाले इस विशाल धार्मिक कार्यक्रम में देशभर से लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर अबिचलनगर साहिब, जिसे पूरी दुनिया में हजूर साहिब के नाम से जाना जाता है, इस ऐतिहासिक समागम का मुख्य केंद्र होगा। गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाला यह ‘शहीदी समागम’ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह गुरु के महान बलिदान को याद करने का एक विशेष अवसर भी है। भक्तों की भारी आमद को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
जिलाधिकारी राहुल कार्दिले ने एक उच्च स्तरीय बैठक में बताया कि श्रद्धालुओं को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए कुल 26 समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां आवास, भोजन, स्वच्छता और यातायात जैसे विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगी। अधिकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग और ठहरने की व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है, ताकि देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए, प्रशासन ने एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। आगंतुकों को त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए कुल 72 अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इन अस्पतालों में विशेष चिकित्सा व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही, भीड़ वाले क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार केंद्रों की व्यवस्था भी की जा रही है।
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इस शहादत दिवस को केवल धार्मिक रीति-रिवाजों तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि नई पीढ़ी को गुरु के इतिहास से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों में भाषण प्रतियोगिता और निबंध प्रतियोगिता प्रमुख हैं।
इन आयोजनों के माध्यम से नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर के जीवन, उनकी शिक्षाओं और धर्म की रक्षा के लिए उनके द्वारा दिए गए बलिदान के बारे में जानकारी प्रसारित की जाएगी। प्रशासन और गुरुद्वारा बोर्ड के बीच समन्वय का उद्देश्य 24 और 25 जनवरी के इस भव्य समागम को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाना है।