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Women’s Day Special: दिव्यांगता को हरा पावरलिफ्टर से बनीं जिला क्रीड़ा अधिकारी, जानें संघर्ष की दास्तां

शहर की महिला पावर लिफ्टर लतिका माने (लेकुरवाले) ने दिव्यांग होते हुए भी जिला क्रीड़ा अधिकारी की नौकरी हासिल की। आंतरराष्ट्रीय पदक विजेती लतिका को महाराष्ट्र सरकार ने वर्धा जिले में थेट नियुक्त प्रदान की है।

  • By आंचल लोखंडे
Updated On: Mar 08, 2025 | 04:51 PM

पावरलिफ्टर से बनीं जिला क्रीड़ा अधिकारी।

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Women’s Day Special: ‘लतिका’ शब्द का अर्थ होता है ‘छोटी बेल’, लेकिन आरेंज सिटी की एक लतिका ऐसी है जिसने अपनी सफलता के दम पर अपने नाम का अर्थ बदल दिया। शहर की महिला पावर लिफ्टर लतिका माने (लेकुरवाले) ने दिव्यांग होते हुए भी जिला क्रीड़ा अधिकारी की नौकरी हासिल की। आंतरराष्ट्रीय पदक विजेती लतिका को महाराष्ट्र सरकार ने वर्धा जिले में नियुक्ति प्रदान की है। अपनी जिद के दम पर लतिका ने भारत को दिव्यांग एशिया कप में स्वर्ण पदक दिलाया है।

कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की दिव्यांग पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में पदक जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन करने वाली लतिका ने कभी हार नहीं मानी। मध्यम वर्ग आर्थिक परिस्थिति होने के बावजूद लतिका ने खेल और पढ़ाई दोनों जारी रखी। एमए तक शिक्षण प्राप्त कर लतिका ने 2013 में राज्य सरकार द्वारा जारी भतीं में फार्म भरा। 2015 में क्रीड़ा मंत्री विनोद तावडे ने पदक विजेता दिव्यांग खिलाड़ियों नियुक्ति में सामान्य खिलाड़ी यो जैसे ही मौका देने की पहल कर शासन परिपत्रक निकाला।

2018 को जिला क्रीड़ा अधिकारी के तौर पर नियुक्ति

आवेदन स्वीकार्य करने को मान्यता प्रदान की। ऐसे में दिव्यांग खिलाड़ियों को सीधे नियुक्ति प्रदान करने के लिए राज्य के मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन की अध्यक्षता में समिति बनाई गई। 3 अगस्त 2018 को स्वयं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समिति की बैठक की अध्यक्षता की और लतिका को जिला क्रीड़ा अधिकारी के तौर पर नियुक्ति की गई। लतिका माने-लेकुरवाले अंततः 18 अप्रैल, 2019 को वर्धा में शामिल हो गईं। ‘पावरलिफ्टिंग’ जैसे अपवादों वाले खेलों में लतिका के इस प्रदर्शन के कारण एक मिसाल कायम की। इससे निश्चित रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों में उत्साह बन रहा है।

एशिया में कमाया नाम

2006 को फेस्पीक गेम्स होने के बाद वह एशियन गेम्स नाम से जाना जाता है। लतिका ने 2006 में मलेशिया के क्वालालंपुर में आयोजित 9वीं फेस्पीक गेम्स में भारत को रजत पदक दिलाया। इसके बाद 2009 में 3री पावरलिफ्टिंग ओपन एशिया चैंपियनशिप, क्वालालंपुर (मलेशिया) में उन्होंने भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में सफलता दर्ज की। 2010 में एशियन गेम्स (चाइना) गुझग्वान में चौथे स्थान पर रहीं।

इससे पहले 2007 में ताइवान (चाइनीज ताइपे) में वर्ल्ड आयवॉस गेम्स (आईडब्ल्यूएएस) स्पर्धा में लतिका को चौथा स्थान मिला था और 2009 में बंगलुरू में उन्होंने रजत जीता। उन्हें अर्जुन व द्रोणाचार्य पुरस्कार श्री विजय मुनिश्वर उनके प्रशिक्षक व मार्गदर्शक रहे हैं तथा पति राहुल लेकुरवाले मैदानी खेलों में सहायक रहे हैं। लतिका ने पावरलिफ्टिंग अंतरराष्ट्रीय खेलों में 3 पदक एवं राष्ट्रीय खेलों में 18 पदक तथा मैदानी खेलों (भालाफेक, गोला फेक, थाली फेक) में 48 पदक जीते हैं।

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हम किसी से कम नहीं

लतिका ने कहा कि पहले आमतौर पर दिव्यांग खिलाड़ियों की अधिक पूछपरख नहीं होती है। लेकिन 2014 के बाद राज्य सरकार ने जिस प्रकार हमारे बारे में सोचना शुरू किया है, मैं उसकी आभारी हूं। इससे न केवल महाराष्ट्र बल्कि देश में भी दिव्यांग खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा है। आज हर ओलंपिक में देश के दिव्यांग खिलाड़ी अप्रत्याशित रूप से सफलता दर्ज कर पदक जीत रहे हैं। इससे साबित होता है कि हम दिव्यांग भी किसी से कम नहीं हैं।

कई बड़े पुरस्कार किए अपने नाम

लतिका को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। महाराष्ट्र सरकार ने 2003-04 में उन्हें शिव छत्रपति पुरस्कार प्रदान किया था। इसके अलावा नागपुर जिला सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (2004-05), महाराष्ट्र राज्य पैरा ओलंपिक एसोसिएशन वर्चुअस वुमेन (2005), पारख सोशल वेलफेयर खेल रत्न (2004), विदर्भ स्पोर्ट्स काउंसिल (2005), स्ट्रांग वुमेन ऑफ इंडिया (2006), विदर्भ गौरव (2007), नागपुर नागरिक सत्कार (2007), सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (2008), राज्य युवा खेल पुरस्कार (2009-10), नागपुर जैसे पुरस्कार उन्हें प्राप्त हो चुके हैं। बता दें कि वर्तमान में लतिका माने भंडारा में जिला क्रीड़ा अधिकारी के पद पर कार्यरत है।

Womens day special divyang latika sets an example from powerlifter to district sports officer

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Published On: Mar 08, 2025 | 03:43 PM

Topics:  

  • Devendra Fadnavis
  • International Women's Day
  • Maharashtra Government
  • Nagpur News
  • Sports

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