किडनी प्रत्यारोपण (सौजन्य-सोशल मीडिया)
ZTCC Nagpur Data 2026: विदर्भ में किडनी से जुड़े मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है। जोनल ट्रान्सप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेडटीसीसी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 10 मार्च, 2026 तक किडनी प्रत्यारोपण के लिए 1,163 मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं। इनमें 817 पुरुष और 346 महिला मरीज शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह कि इस सूची में 15 बच्चे भी किडनी प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, असंतुलित जीवनशैली और दवाओं का अधिक सेवन किडनी फेल होने के प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। ऐसे में किडनी से जुड़ीं बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार किडनी की बीमारी अक्सर शुरुआती चरण में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आती। हालांकि शरीर में सूजन, पेशाब की मात्रा में बदलाव, लगातार थकान, भूख कम लगना और रक्तचाप बढ़ना जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक कम पानी पीना, स्वच्छता की कमी और व्यस्त जीवनशैली के कारण मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) के मामलों में भी वृद्धि हो रही है। शुरुआती दौर में साधारण लगने वाला यह संक्रमण अगर समय पर उपचार न लिया जाए तो किडनी तक पहुंचकर गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। शरीर की संरचना के कारण महिलाओं में यूटीआई का खतरा अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित मधुमेह और उच्च रक्तचाप किडनी फेल होने के प्रमुख कारण हैं। इसलिए इन बीमारियों पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। वहीं प्रत्यारोपण के लिए बड़ी संख्या में मरीजों के इंतजार को देखते हुए समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि ब्रेन डेड मरीजों के परिजन अंगदान का निर्णय लेते हैं, तो कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।