नागपुर हाई कोर्ट अपडेट: विदर्भ की विस्फोटक इकाइयों में हादसों की होगी विशेषज्ञ जांच
Nagpur High Court: विदर्भ की विस्फोटक निर्माण इकाइयों में हुए हादसों को लेकर केंद्र सरकार ने विशेषज्ञ जांच शुरू करने का फैसला लिया है। हाई कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र से हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, हाई कोर्ट, जांच,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Vidarbha Explosive Factory: नागपुर विदर्भ क्षेत्र में स्थित विस्फोटक निर्माण इकाइयों में हो रहे जानलेवा हादसों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता जम्मू आनंद की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। शुक्रवार को न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे के समक्ष याचिका पर सुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे उप सालिसिटर जनरल शुक्ल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें विभाग से सूचना प्राप्त हुई है कि केंद्र,सरकर ने इस विस्फोट की गंभीर घटना के मद्देनजर विस्फोटक अधिनियम 1884 की धारा 9ए के तहत विशेष और विशेषज्ञ जांच शुरू करने का निर्णय लिया है।
इसलिए मजिस्ट्रेट जांच समाप्त की जा रही है। इसके बाद हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधि। अरविंद वाघमारे ने पैरवी की।
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जांच पर उठाए गए थे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष यह अहम मुद्दा उठाया गया कि इतने संगीन और गंभीर मामले में केंद्र सरकार ने ‘द एक्सप्लोसिव एक्ट 1884’ की धारा 9A के तहत जांच की अधिसूचना ही जारी नहीं की। याचिकाकर्ता के अनुसार तत्कालीन जिलाधिकारी ने इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद धारा 9(1) के तहत एक सामान्य जांच बैठा दी, जो सरासर गलत है।
नियमानुसार, धारा 9 के तहत जांच टीम में भारत सरकार के मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, सक्षम जांच अधिकारी और कानून व मामले के विशेषज्ञों का शामिल होना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक चुप्पी साध रखी है, जिसे हाई कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया।
6 केस होने के बावजूद कैसे रिन्यू हुआ कंपनी का लाइसेंस ?
अदालत ने आरोपी कपनी ‘एसबीएल’ के लाइसेंस नवीनीकरण (रिन्यूअल) पर भी कड़ा प्रहार किया था। हाई कोर्ट ने पूछा था कि जब नियमों का पालन न करने को लेकर एसबीएल कंपनी के खिलाफ पहले से ही 6 अदालती मामले (कोर्ट केस) दर्ज थे, तो उसका लाइसेंस रिन्यू कैसे किया गया? अदालत का स्पष्ट मानना था कि यदि कंपनी का लाइसेंस रिन्यू नहीं किया गया होता, तो यह दुखद घटना घटित ही नहीं होती।
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सुनवाई के दौरान यह बात प्रमुखता से रखी गई कि केंद्र सरकार के खिलाफ की गई मांग केवल एक ‘नीति के निर्माण’ तक ही सीमित है। इसके साथ ही केंद्र की ओर से यह दलील दी गई कि खुद याचिकाकर्ता की दलीलों के अनुसार भी यह मामला अनिवार्य रूप से’ राज्य’ के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि केंद्र’ के, औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय के अपर निदेशक द्वारा दायर हलफनामा के अनुसार इस घटना की विभागीय जांच अभी जारी है।
